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Friday, 8 July 2016

Tinospora dengue are the panacea, papaya and fenugreek

Dengue disease is creeping in cities with fast enough. That's what the best treatment is to prevent dengue. Around your house or if someone is suffering from dengue disease tinospora, papaya and fenugreek leaves can be cured.

Tinospora, boosting the immune system in patients with dengue and dengue fever leaves of papaya and relieving work. According to experts in blood and fever Pletlents home remedies work fairly soon come to an end. You better and cheaper treatment of dengue fever will not end. Let us know about these treatments -

Tinospora

It is helpful in building the immune system. Dundee Dundee Bell tinospora take during fever or small pieces. They are boiled in 2 glasses of water. Then cools the water remains half Pilaye patient. You will find that in just 45 minutes after the patient's red blood cells Bld will begin to move.

Papaya leaves

fresh and young leaves of papaya extract poison from the body in dengue Vishaile aid. Grind fresh leaves of papaya drink its juice to the patient platelets are beginning to grow.

Fenugreek leaves

patient pain and discomfort to the fenugreek leaves are quite nice. This level of fever and blood pressure levels are normal.

These 4 needed to reduce obesity in night work

Today, every third person in five is obese. If you are also trying to reduce obesity by several months and can not achieve Kamiabi, some important rules to follow.

At night before going to bed for some important rules to follow if you do, you will understand that just work for you to loose weight. We work to reduce the body fat keeps in regular day and night, so below are some of the course work shall live, allowing you to take forthwith reduced obesity.

Plenty of pepper

Scientific studies have shown that obesity should reduce the intake of chili. Eating before bed to take it to the process of consecutive decreases Budget.

Drink green tea

Drinking green tea at night before going to bed Matabolizm body increases, which keeps your weight loss overnight.

Not eat sugar and starch

Carbs are the sugars and starches that turn stimulate insulin release process. Insulin is the body's main fat storage hormone. When insulin levels are low, the body starts to burn the stored fat, so do not eat carbs at night.

get plenty of sleep

Poor sleep can increase your weight can make obese. Access to some relaxation techniques before bed, such as attention, pleasant, listened to music, hot bath, etc. Good sleep is the body's metabolism increases and fat burning. The hormone controls the body's sleep does not Bhunk Jises frequently and decreases the body's energy is not.

Diabetes patients have the panacea for the insulin plant

The problem of obesity and diabetes

Nowadays, because of bad food and lack of physical mobility problem of growing obesity and diabetes is becoming common. Often seen nowadays that everyone is starting to avoiding sweet person, fearing that too much sitting can not catch diabetes in its grip.

disease 

Diabetes is a disease with which Taumr. Yes, the level of sugar in the body can be controlled but must be got rid of completely, it is not possible.

Insulin support

Those with a high sugar increases, along with the medicines also are forced to take recourse to insulin. Once accustomed to the use of insulin to the body we have created, the rules under which the person concerned has to take insulin.

Sugar in the body

Regular insulin and patients taking the drug for diabetes that we have today is good news. That news is that if you eat the plant's leaves can control the level of sugar in your body. You will not have to put up medication or insulin injections.

Costs Igneus

Costs Igneus people to plant name known plant insulin. You may receive a false start but the truth is that all of these things, the modern science has placed his seal on the properties of the insulin plant.
High diabetes

By taking this herbal plant leaves can be used to control the high diabetes.

Two types of diabetes

There are two types of diabetes in the body, according to experts. There is a second type one diabetes and type II diabetes.

Type One diabetes

Type One diabetes the patient's body does not make insulin. Therefore, the person has to inject insulin Taumr. Diabetes nearly 10 percent of patients with Type One is found.

Type II diabetes

However, type II diabetes if the person's body makes insulin, but the amount is not enough. Or injecting the drug into the body of these patients, causing insulin is transported through anyone.

Hormone

According to experts, the number of patients suffering from diabetes to nearly 80 percent. Regular intake of plant leaves insulin in pancreas beta cells of the hormone-producing gland strong.

Pancreas

Resulting pancreas makes more insulin, which led to no additional medication is required.

Needs insulin

So far, we tell you a lot about insulin, but somewhere in your mind flashes that will be the question of why our bodies need so why is insulin?

Wednesday, 6 July 2016

कलौंजी : बड़ी से बड़ी बीमारी का एक इलाज

कलौंजी : बड़ी से बड़ी बीमारी का एक इलाज

“मौत को छोड कर हर मर्ज की दवाई है कलौंजी…..! “

कलयुग में धरती पर संजीवनी है कलौंजी, अनगिनत रोगों को चुटकियों में ठीक करता है।

कैसे करें इसका सेवन

कलौंजी के बीजों का सीधा सेवन किया जा सकता है।
एक छोटा चम्मच कलौंजी को शहद में मिश्रित करके इसका सेवन करें।
पानी में कलौंजी उबालकर छान लें और इसे पीएं।
दूध में कलौंजी उबालें। ठंडा होने दें फिर इस मिश्रण को पीएं।
कलौंजी को ग्राइंड करें तथा पानी तथा दूध के साथ इसका सेवन करें।
कलौंजी को ब्रैड, पनीर तथा पेस्ट्रियों पर छिड़क कर इसका सेवन करें।
ये किन -किन रोगों में सहायक है :-

टाइप-2 डायबिटीज
प्रतिदिन 2 ग्राम कलौंजी के सेवन के परिणामस्वरूप तेज हो रहा ग्लूकोज कम होता है। इंसुलिन रैजिस्टैंस घटती है,बीटा सैल की कार्यप्रणाली में वृद्धि होती है तथा ग्लाइकोसिलेटिड हीमोग्लोबिन में कमी आती है।

मिर्गी
2007 में हुए एक अध्ययन के अनुसार मिर्गी से पीड़ित बच्चों में कलौंजी के सत्व का सेवन दौरे को कम करता है।

उच्च रक्तचाप
100 या 200 मिलीग्राम कलौंजी के सत्व के दिन में दो बार सेवन से हाइपरटैंशन के मरीजों में ब्लड प्रैशर कम होता है।

दमा :
कलौंजी को पानी में उबालकर इसका सत्व पीने से अस्थमा में काफी अच्छा प्रभाव पड़ता है।

रक्तचाप (ब्लडप्रेशर)
रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) में एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीने से रक्तचाप सामान्य बना रहता है। तथा 28 मिलीलीटर जैतुन का तेल और एक चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर पूर शरीर पर मालिश आधे घंटे तक धूप में रहने से रक्तचाप में लाभ मिलता है। यह क्रिया हर तीसरे दिन एक महीने तक करना चाहिए।

गंजापन
जली हुई कलौंजी को हेयर ऑइल में मिलाकर नियमित रूप से सिर पर मालिश करने से गंजापन दूर होकर बाल उग आते हैं।

त्वचा के विकार
कलौंजी के चूर्ण को नारियल के तेल में मिलाकर त्वचा पर मालिश करने से त्वचा के विकार नष्ट होते हैं।

लकवा
कलौंजी का तेल एक चौथाई चम्मच की मात्रा में एक कप दूध के साथ कुछ महीने तक प्रतिदिन पीने और रोगग्रस्त अंगों पर कलौंजी के तेल से मालिश करने से लकवा रोग ठीक होता है।

कान की सूजन, बहरापन
कलौंजी का तेल कान में डालने से कान की सूजन दूर होती है। इससे बहरापन में भी लाभ होता है।

सर्दी-जुकाम
कलौंजी के बीजों को सेंककर और कपड़े में लपेटकर सूंघने से और कलौंजी का तेल और जैतून का तेल बराबर की मात्रा में नाक में टपकाने से सर्दी-जुकाम समाप्त होता है। आधा कप पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल व चौथाई चम्मच जैतून का तेल मिलाकर इतना उबालें कि पानी खत्म हो जाएं और केवल तेल ही रह जाएं। इसके बाद इसे छानकर 2 बूंद नाक में डालें। इससे सर्दी-जुकाम ठीक होता है। यह पुराने जुकाम भी लाभकारी होता है।

पेट के कीडे़
10 ग्राम कलौंजी को पीसकर 3 चम्मच शहद के साथ रात सोते समय कुछ दिन तक नियमित रूप से सेवन करने से पेट के कीडे़ नष्ट हो जाते हैं।

प्रसव की पीड़ा
कलौंजी का काढ़ा बनाकर सेवन करने से प्रसव की पीड़ा दूर होती है।

पोलियों का रोग
आधे कप गर्म पानी में एक चम्मच शहद व आधे चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय लें। इससे पोलियों का रोग ठीक होता है।

मुंहासे
सिरके में कलौंजी को पीसकर रात को सोते समय पूरे चेहरे पर लगाएं और सुबह पानी से चेहरे को साफ करने से मुंहासे कुछ दिनों में ही ठीक हो जाते हैं।

स्फूर्ति
स्फूर्ति (रीवायटल) के लिए नांरगी के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सेवन करने से आलस्य और थकान दूर होती है।

गठिया
कलौंजी को रीठा के पत्तों के साथ काढ़ा बनाकर पीने से गठिया रोग समाप्त होता है।

जोड़ों का दर्द
एक चम्मच सिरका, आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय पीने से जोड़ों का दर्द ठीक होता है।

आंखों के सभी रोग
आंखों की लाली, मोतियाबिन्द, आंखों से पानी का आना, आंखों की रोशनी कम होना आदि। इस तरह के आंखों के रोगों में एक कप गाजर का रस, आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर दिन में 2बार सेवन करें। इससे आंखों के सभी रोग ठीक होते हैं। आंखों के चारों और तथा पलकों पर कलौंजी का तेल रात को सोते समय लगाएं। इससे आंखों के रोग समाप्त होते हैं। रोगी को अचार, बैंगन, अंडा व मछली नहीं खाना चाहिए।

स्नायुविक व मानसिक तनाव
एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल डालकर रात को सोते समय पीने से स्नायुविक व मानसिक तनाव दूर होता है।

गांठ
कलौंजी के तेल को गांठो पर लगाने और एक चम्मच कलौंजी का तेल गर्म दूध में डालकर पीने से गांठ नष्ट होती है।

मलेरिया का बुखार
पिसी हुई कलौंजी आधा चम्मच और एक चम्मच शहद मिलाकर चाटने से मलेरिया का बुखार ठीक होता है।

स्वप्नदोष
यदि रात को नींद में वीर्य अपने आप निकल जाता हो तो एक कप सेब के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार सेवन करें। इससे स्वप्नदोष दूर होता है। प्रतिदिन कलौंजी के तेल की चार बूंद एक चम्मच नारियल तेल में मिलाकर सोते समय सिर में लगाने स्वप्न दोष का रोग ठीक होता है। उपचार करते समय नींबू का सेवन न करें।

कब्ज
चीनी 5 ग्राम, सोनामुखी 4 ग्राम, 1 गिलास हल्का गर्म दूध और आधा चम्मच कलौंजी का तेल। इन सभी को एक साथ मिलाकर रात को सोते समय पीने से कब्ज नष्ट होती है।

खून की कमी
एक कप पानी में 50 ग्राम हरा पुदीना उबाल लें और इस पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह खाली पेट एवं रात को सोते समय सेवन करें। इससे 21 दिनों में खून की कमी दूर होती है। रोगी को खाने में खट्टी वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए।

पेट दर्द
किसी भी कारण से पेट दर्द हो एक गिलास नींबू पानी में 2 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीएं। उपचार करते समय रोगी को बेसन की चीजे नहीं खानी चाहिए। या चुटकी भर नमक और आधे चम्मच कलौंजी के तेल को आधा गिलास हल्का गर्म पानी मिलाकर पीने से पेट का दर्द ठीक होता है। या फिर 1 गिलास मौसमी के रस में 2 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीने से पेट का दर्द समाप्त होता है।

सिर दर्द
कलौंजी के तेल को ललाट से कानों तक अच्छी तरह मलनें और आधा चम्मच कलौंजी के तेल को 1 चम्मच शहद में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से सिर दर्द ठीक होता है। कलौंजी खाने के साथ सिर पर कलौंजी का तेल और जैतून का तेल मिलाकर मालिश करें। इससे सिर दर्द में आराम मिलता है और सिर से सम्बंधित अन्य रोगों भी दूर होते हैं।
कलौंजी के बीजों को गर्म करके पीस लें और कपड़े में बांधकर सूंघें। इससे सिर का दर्द दूर होता है। कलौंजी और काला जीरा बराबर मात्रा में लेकर पानी में पीस लें और माथे पर लेप करें। इससे सर्दी के कारण होने वाला सिर का दर्द दूर होता है।

उल्टी
आधा चम्मच कलौंजी का तेल और आधा चम्मच अदरक का रस मिलाकर सुबह-शाम पीने से उल्टी बंद होती है।

हार्निया
3 चम्मच करेले का रस और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह खाली पेट एवं रात को सोते समय पीने से हार्निया रोग ठीक होता है।

मिर्गी के दौरें
एक कप गर्म पानी में 2 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से मिर्गी के दौरें ठीक होते हैं। मिर्गी के रोगी को ठंडी चीजे जैसे- अमरूद, केला, सीताफल आदि नहीं देना चाहिए।

पीलिया
एक कप दूध में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर प्रतिदिन 2 बार सुबह खाली पेट और रात को सोते समय 1 सप्ताह तक लेने से पीलिया रोग समाप्त होता है। पीलिया से पीड़ित रोगी को खाने में मसालेदार व खट्टी वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए।

कैंसर का रोग
एक गिलास अंगूर के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 3 बार पीने से कैंसर का रोग ठीक होता है। इससे आंतों का कैंसर, ब्लड कैंसर व गले का कैंसर आदि में भी लाभ मिलता है। इस रोग में रोगी को औषधि देने के साथ ही एक किलो जौ के आटे में 2 किलो गेहूं का आटा मिलाकर इसकी रोटी, दलिया बनाकर रोगी को देना चाहिए। इस रोग में आलू, अरबी और बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए। कैंसर के रोगी को कलौंजी डालकर हलवा बनाकर खाना चाहिए।

दांत
कलौंजी का तेल और लौंग का तेल 1-1 बूंद मिलाकर दांत व मसूढ़ों पर लगाने से दर्द ठीक होता है। आग में सेंधानमक जलाकर बारीक पीस लें और इसमें 2-4 बूंदे कलौंजी का तेल डालकर दांत साफ करें। इससे साफ व स्वस्थ रहते हैं।
दांतों में कीड़े लगना व खोखलापन: रात को सोते समय कलौंजी के तेल में रुई को भिगोकर खोखले दांतों में रखने से कीड़े नष्ट होते हैं।

नींद
रात में सोने से पहले आधा चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से नींद अच्छी आती है।

मासिकधर्म
कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से मासिकधर्म शुरू होता है। इससे गर्भपात होने की संभावना नहीं रहती है।
जिन माताओं बहनों को मासिकधर्म कष्ट से आता है उनके लिए कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में सेवन करने से मासिकस्राव का कष्ट दूर होता है और बंद मासिकस्राव शुरू हो जाता है।
कलौंजी का चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में शहद मिलाकर चाटने से ऋतुस्राव की पीड़ा नष्ट होती है।
मासिकधर्म की अनियमितता में लगभग आधा से डेढ़ ग्राम की मात्रा में कलौंजी के चूर्ण का सेवन करने से मासिकधर्म नियमित समय पर आने लगता है।
यदि मासिकस्राव बंद हो गया हो और पेट में दर्द रहता हो तो एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम पीना चाहिए। इससे बंद मासिकस्राव शुरू हो जाता है।

गर्भवती महिलाओं
कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन 2-3 बार सेवन करने से मासिकस्राव शुरू होता है। गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं कराना चाहिए क्योंकि इससे गर्भपात हो सकता है।

स्तनों का आकार
कलौंजी आधे से एक ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से स्तनों का आकार बढ़ता है और स्तन सुडौल बनता है।

स्तनों में दुध
कलौंजी को आधे से 1 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम खाने से स्तनों में दुध बढ़ता है।

स्त्रियों के चेहरे व हाथ-पैरों की सूजन:
कलौंजी पीसकर लेप करने से हाथ पैरों की सूजन दूर होती है।

बाल लम्बे व घने
50 ग्राम कलौंजी 1 लीटर पानी में उबाल लें और इस पानी से बालों को धोएं। इससे बाल लम्बे व घने होते हैं।

बेरी-बेरी रोग
बेरी-बेरी रोग में कलौंजी को पीसकर हाथ-पैरों की सूजन पर लगाने से सूजन मिटती है।

भूख का अधिक लगना
50 ग्राम कलौंजी को सिरके में रात को भिगो दें और सूबह पीसकर शहद में मिलाकर 4-5 ग्राम की मात्रा सेवन करें। इससे भूख का अधिक लगना कम होता है।

नपुंसकता
कलौंजी का तेल और जैतून का तेल मिलाकर पीने से नपुंसकता दूर होती है।

खाज-खुजली
50 ग्राम कलौंजी के बीजों को पीस लें और इसमें 10 ग्राम बिल्व के पत्तों का रस व 10 ग्राम हल्दी मिलाकर लेप बना लें। यह लेप खाज-खुजली में प्रतिदिन लगाने से रोग ठीक होता है।

नाड़ी का छूटना
नाड़ी का छूटना के लिए आधे से 1 ग्राम कालौंजी को पीसकर रोगी को देने से शरीर का ठंडापन दूर होता है और नाड़ी की गति भी तेज होती है। इस रोग में आधे से 1ग्राम कालौंजी हर 6 घंटे पर लें और ठीक होने पर इसका प्रयोग बंद कर दें।
कलौंजी को पीसकर लेप करने से नाड़ी की जलन व सूजन दूर होती है।

हिचकी
एक ग्राम पिसी कलौंजी शहद में मिलाकर चाटने से हिचकी आनी बंद हो जाती है। तथा कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में मठ्ठे के साथ प्रतिदिन 3-4 बार सेवन से हिचकी दूर होती है। या फिर कलौंजी का चूर्ण 3 ग्राम मक्खन के साथ खाने से हिचकी दूर होती है। और यदि आप काले उड़द चिलम में रखकर तम्बाकू के साथ पीने से हिचकी में लाभ होता है।
3 ग्राम कलौंजी पीसकर दही के पानी में मिलाकर खाने से हिचकी ठीक होती है।

स्मरण शक्ति
लगभग 2 ग्राम की मात्रा में कलौंजी को पीसकर 2 ग्राम शहद में मिलाकर सुबह-शाम खाने से स्मरण शक्ति बढ़ती है।

छींके
कलौंजी और सूखे चने को एक साथ अच्छी तरह मसलकर किसी कपड़े में बांधकर सूंघने से छींके आनी बंद हो जाती है।

पेट की गैस
कलौंजी, जीरा और अजवाइन को बराबर मात्रा में पीसकर एक चम्मच की मात्रा में खाना खाने के बाद लेने से पेट की गैस नष्ट होता है।

पेशाब की जलन
250 मिलीलीटर दूध में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से पेशाब की जलन दूर होती है।

दमा रोग (ASTHMA)
एक चुटकी नमक, आधा चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच घी मिलाकर छाती और गले पर मालिश करें और साथ ही आधा चम्मच कलौंजी का तेल 2 चम्मच शहद के साथ मिलाकर सेवन करें। इससे दमा रोग में आराम मिलता है।

पथरी
250 ग्राम कलौंजी पीसकर 125 ग्राम शहद में मिला लें और फिर इसमें आधा कप पानी और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर प्रतिदिन 2 बार खाली पेट सेवन करें। इस तरह 21 दिन तक पीने से पथरी गलकर निकल जाती है।

सूजन
यदि चोट या मोच आने के कारण शरीर के किसी भी स्थान पर सूजन आ गई हो तो उसे दूर करने के लिए कलौंजी को पानी में पीसकर लगाएं। इससे सूजन दूर होती है और दर्द ठीक होता है। कलौंजी को पीसकर हाथ पैरों पर लेप करने से हाथ-पैरों की सूजन दूर होती है।

स्नायु की पीड़ा
दही में कलौंजी को पीसकर बने लेप को पीड़ित अंग पर लगाने से स्नायु की पीड़ा समाप्त होती है।

जुकाम
20 ग्राम कलौंजी को अच्छी तरह से पकाकर किसी कपड़े में बांधकर नाक से सूंघने से बंद नाक खुल जाती है और जुकाम ठीक होता है।
जैतून के तेल में कलौंजी का बारीक चूर्ण मिलाकर कपड़े में छानकर बूंद-बूंद करके नाक में डालने से बार-बार जुकाम में छींक आनी बंद हो जाती हैं और जुकाम ठीक होता है। कलौंजी को सूंघने से जुकाम में आराम मिलता है।
यदि बार-बार छींके आती हो तो कलौंजी के बीजों को पीसकर सूंघें।

बवासीर के मस्से
कलौंजी की भस्म को मस्सों पर नियमित रूप से लगाने से बवासीर का रोग समाप्त होता है।

वात रोग
वात रोग में कलौंजी के तेल से रोगग्रस्त अंगों पर मालिश करने से वात की बीमारी दूर होती है।

नोट: ध्यान रखें कि इस दवा का प्रयोग गर्भावस्था में नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे गर्भ नष्ट हो सकता है।

Home remedies to prevent skin diseases

Domestic measures to avoid skin diseases

1. eczema, psoriasis and skin diseases can be of many types.

2. The rain can be more irritating skin disease.

3. marigold is very beneficial in skin related diseases.

4. Use Kamemail gives relief from skin irritation.
You can have problems with many skin diseases. Rain and hot weather are more such problems. So it is important to protect the skin. Skin disease is more likely to be otherwise. Let us avoid skin diseases are some information about home remedy.

Home remedies to prevent skin diseases

Marigold

Is deep yellow and orange marigold flowers. The effective domestic remedy skin problems. This minor cuts, burns, mosquito bites, dry skin and great home remedy for acne, etc. Lilies anti-bacterial and anti-viral properties. It also helps to reduce inflammation. Simultaneously marigold helps wounds heal quickly. It is beneficial for every skin type. Marigold leaves boiled in water to wash his face twice or thrice a day cures the problem of acne.

Chamomile

Chamomile flowers calms irritation on the skin by applying plenty of it if you inner peace as well as offers. It also puts a positive effect on the central nervous system. It also is helpful in eczema. Herbal tea made from the flowers of the benefits you have consumed three times a day. Diseases like eczema and psoriasis, as well as significantly helps overcome this flower. Her skin with a clean cloth soaked in chamomile tea and apply on the infected part of the benefit. This process fifteen-fifteen minutes four to six times a day should do. Chamomile is also used in many under-eye Mashcraijr. This dark circle are away

Kmfre

The flowers, leaves and roots of the centuries to cure skin diseases have been used. This cut, burn and other injuries is quite beneficial. It rapidly absorbed by the skin tend to Ttwa. Which is to build healthy cells. These elements are also found to relieve skin. If the skin anywhere on the wound by making Kmfre root powder mixed in hot water to make a thick paste. Spread it on a clean cloth. The cloth is now putting on wounds miraculous benefits. If you go to sleep at night tied, then by morning you get enough rest. It should not have ever eaten, otherwise it can damage the liver. Deep wounds should not use it. This then is the upper layer of skin, but not the inner cells fail to fully recover.

Linseed seeds

Omega three fatty acids in flax seeds and strengthen our immune system helps. It contains ingredients that reduce inflammation. The Skin Disorder, such as eczema and psoriasis is Grta also help to fix. One or two teaspoons of flax seed oil daily intake is highly beneficial for the skin. It will be better to be consumed with other foods.

Other measures

Turmeric, red sandalwood, neem bark, salicylic, myrrh, amla, HAREDA and leaves Aduse take an equal amount. These items, please soaked in water to thrive perfectly. So all of these things to fully flower paste Collect loose powder. Now, more than four times the amount of sesame oil paste it.

Four times the amount of sesame oil in a pot with water, all the items found in it. The mixture then keep warm on low dim until all the water has not evaporated. This paste is itching all over the body wherever there or Take a whole body. It will continue to recover your skin from skin diseases.

Eczema, psoriasis, warts, Lukordma, Skebij or itchy skin disease Any type of herpes is not the right, very painful. Due to which the man is mentally ill. On the problem of skin diseases you can get advice from a doctor.

चर्म रोग से बचने के घरेलू उपाय

चर्म रोग से बचने के घरेलू उपाय

1. एक्जिमा, सोरायसिस आदि कई प्रकार का हो सकता है चर्म रोग।

2. बारिशों में अधिक परेशान कर सकते हैं त्‍वचा संबंधी रोग।

3. गेंदे का फूल त्‍वचा संबंधी रोगों में होता है बहुत लाभकारी।

4. कैमेमाइल का उपयोग त्‍वचा को जलन से देता है राहत।
चर्म रोग आपको कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं। बारिशों और गर्मी के मौसम में इस तरह की समस्याएं अधिक होती हैं। ऐसे में त्वचा का बचाव करना बहुत जरूरी होता है। नहीं तो चर्म रोग होने की संभावना ज्यादा होती है। आइए हम आपको चर्म रोग से बचने के कुछ घरेलू उपाय के बारे में जानकरी दे रहे हैं।

चर्म रोग से बचने के घरेलू उपचार

गेंदा

गेंदा गहरे पीले और नारंगी रंग का फूल होता है। यह त्‍वचा की समस्‍याओं का प्रभावशाली घरेलू उपाय है। यह छोटे-मोटे कट, जलने, मच्‍छर के काटने, रूखी त्‍वचा और एक्‍ने आदि के लिए शानदार घरेलू उपाय है। गेंदे में एंटी-बैक्‍टीरियल और एंटी-वायरल गुण होते हैं। यह सूजन को कम करने में भी मदद करता है। इसके साथ ही गेंदा जख्‍मों को जल्‍दी भरने में मदद करता है। यह हर प्रकार की त्‍वचा के लिए लाभकारी होता है। गेंदे की पत्तियों को पानी में उबालकर उससे दिन में दो-तीन बार चेहरा धोने से एक्‍ने की समस्‍या दूर होती है।

कैमोमाइल/ बबूने का फूल

कैमोमाइल का फूल त्‍वचा पर लगाने से जलन को शांत करता है और साथ ही अगर इसका सेवन किया जाए तो आंतरिक शांति प्रदान करता है। इसके साथ ही यह केंद्रीय तंत्रिका प्रणाली पर भी सकारात्‍मक असर डालता है। यह एक्जिमा में भी काफी मददगार होता है। इसके फूलों से बनी हर्बल टी का दिन में तीन बार सेवन आपको काफी फायदा पहुंचाता है। इसके साथ ही एक्जिमा और सोरायसिस जैसी बीमारियों से उबरने में भी यह फूल काफी मदद करता है। एक साफ कपड़े को कैमोमाइल टी में डुबोकर उसे त्‍वचा के सं‍क्रमित हिस्‍से पर लगाने से काफी लाभ मिलता है। इस प्रक्रिया को पंद्रह-पंद्रह मिनट के लिए दिन में चार से छह बार करना चाहिए। कैमोमाइल कई अंडर-आई माश्‍चराइजर में भी प्रयोग होता है।  इससे डार्क सर्कल दूर होते हैं

कमफ्रे

इस फूल के पत्‍ते और जड़ें सदियों से त्‍वचा संबंधी रोगों को ठीक करने में इस्‍तेमाल की जाती रही हैं। यह कट, जलना और अन्‍य कई जख्‍मों में काफी लाभकारी होता है। इसमें मौजूद तत्‍वा तवचा द्वारा काफी तेजी से अवशोषित कर लिए जाते हैं। जिससे स्‍वस्‍थ कोशिकाओं का निर्माण होता है। इसमें त्‍वचा को आराम पहुंचाने वाले तत्‍व भी पाए जाते हैं। अगर त्‍वचा पर कहीं जख्‍म हो जाए तो कमफ्रे की जड़ों का पाउडर बनाकर उसे गर्म पानी में मिलाकर एक गाढ़ा पेस्‍ट बना लें। इसे एक साफ कपड़े पर फैला दें। अब इस कपड़े को जख्‍मों पर लगाने से चमत्‍कारी लाभ मिलता है। अगर आप इसे रात में बांधकर सो जाएं, तो सुबह तक आपको काफी आराम मिल जाता है। इसे कभी भी खाया नहीं जाना चाहिए, अन्‍यथा यह लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। गहरे जख्‍मों पर भी इसका इस्‍तेमाल नहीं करना चाहिए। इससे त्‍वचा की ऊपरी परत तो ठीक हो जाती है, लेकिन भीतरी कोशिकायें पूरी तरह ठीक नहीं हो पातीं।

अलसी के बीज

अलसी के बीजों में ओमेगा थ्री फैटी एसिड होता है जो हमारे इम्‍यून सिस्‍टम को मजबूत बनाने में मदद करता है। इसमें सूजन को कम करने वाले तत्‍व मौजूद होते हैं। यह स्किन डिस्‍ऑर्डर, जैसे एक्जिमा और सोरायसिस को भी ठीक करने में मदद गरता है। दिन में एक-दो चम्‍मच अलसी के बीजों के तेल का सेवन करना त्‍वचा के लिए काफी फायदेमंद होता है। बेहतर रहेगा कि इसका सेवन किसी अन्‍य आहार के साथ ही किया जाए।

अन्‍य उपाय

हल्दी, लाल चंदन, नीम की छाल, चिरायता, बहेडा, आंवला, हरेडा और अडूसे के पत्ते  को एक समान मात्रा में लीजिए। इन सभी सामानों को पानी में पूरी तरह से फूलने के लिए भिगो दीजिए। जब ये सारे सामान पूरी तरह से फूल जाएं तो पीसकर ढ़ीला पेस्ट बना
लीजिए। अब इस पेस्ट से चार गुना अधिक मात्रा में तिल का तेल लीजिए।

तिल के तेल से चार गुनी मात्रा में पानी लेकर सारे सामानों को एक बर्तन में मिला लीजिए। उसके बाद मिश्रण को मंद आंच पर तब तक गर्म करते रहिए जब तक सारा पानी भाप बनकर उड़ ना जाए। इस पेस्ट को पूरे शरीर में जहां-जहां खुजली हो रही हो वहां पर या फिर पूरे शरीर में लगाइए। इसके लगाते रहने से आपके त्वचा से चर्म रोग ठीक हो जाएगा।

एग्जिमा, सोरियासिस, मस्सा, ल्यूकोर्डमा, स्केबीज या खुजली चर्म रोग के प्रकार हैं।किसी भी प्रकार का चर्म रोग जब तक ठीक नही हो जाता है, बहुत कष्टदायक होता है। जिसके कारण से आदमी मानसिक रूप से बीमार हो जाता है। चर्म रोग की समस्या होने पर आप चिकित्सक से सलाह ले सकते हैं।

Benefits of Almonds

Almonds are very beneficial to our health, because almonds are the biggest source of vitamin E, along with the skin is also very good for the heart. Almond protein, vitamin D, copper, potassium, calcium, magnesium and fiber is found. Many people believe that almonds can be eaten only in winter, but it is not. Let us then we can eat almonds every season we will talk about the benefits of almonds.

Benefits of Almonds

1. Soak almond kernels morning peel off the water at night to eat. It would be very beneficial for the children are studying.

2. diabetic patient can eat almonds, it helps to control sugar levels in diabetes patients of that particular attention should eat almonds daily 3-4.

3. Copper is found in almonds, so the rind to eat, including a lack of blood removes particles in the red.

4. The magnesium in almonds, such as copper and riboflavin nutrients are found, which provide energy to the body in large amounts. Along with almonds brain keeps the body fit.

5. Almond Facial purifies and tones the skin in the works to bring softness.

6. 5-8 kernels of almonds daily meals have less hair fall problem.

7. almonds overnight in water to soak for 5-6 hours and then peel them white kernels morning depreciated drinking sharpen the mind is dissolved in milk, Nerws grows stronger. And this is the best way to eat almonds.

8. almonds calcium and vitamin D in the bones strong. Almonds for everyone from children to the elderly is very beneficial.

9. often continuous work or lack of nutrition in the body are defective vision. Almond consumption is also quite good for the eyes.

10 almonds is very beneficial for pregnant women because of almonds
Folic acid, which is why the mother - the baby is not in the lack of blood.

बादाम के फायदे

बादाम हमारे स्वास्थ के लिए बहुत ही लाभदायक होता है , क्योकि बादाम विटामिन E का सबसे बड़ा स्रोत होता है जो त्वचा के साथ साथ दिल के लिए भी बहुत अच्छा होता है। बादाम में प्रोटीन ,विटामिन D , कॉपर ,पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नेशियम और फाइबर पाया जाता है। बहुत से लोग मानते है कि बादाम को केवल सर्दियों में खाया जा सकता हैं , पर ऐसा नहीं है। बादाम को हम हर मौसम में खा सकते हैं  तो आईये आज हम बादाम से होने वाले फायदों के बारे में बात करेंगें ।

बादाम के फायदे

1. बादाम की गिरी को रात में पानी भिगोकर सुबह छिलका उतार कर खाना चाहिए। यह पढ़ने वाले बच्चों के लिए बहुत ही फायदेमंद होता हैं।

2. मधुमेह के रोगी भी बादाम का सेवन कर सकते हैं, यह शुगर लेवल को कंट्रोल करने में सहायता करता है पर इस बात का ख़ास ध्यान रहे कि मधुमेह रोगी को रोजाना सिर्फ 3-4 बादाम ही खाने चाहिए।

3. बादाम मे कॉपर पाया जाता है इसलिए ये छिलका सहित खाने पर खून मे लाल कणों की कमी को दूर करता है।

4. बादाम में मैग्निशियम,कॉपर और रिबोफ्लेविन जैसे पोषक तत्व पाये जाते हैं, जो शरीर को अधिक मात्रा में ऊर्जा को प्रदान करते हैं। बादाम दिमाग के साथ-साथ शरीर को भी फिट रखता है।

5. बादाम चेहरे की रंगत को निखारता है और ये त्वचा में कोमलता लाने का काम करता है।

6. रोजाना बादाम की 5-8 गिरी खाने से बालों को गिरने की समस्या भी कम होती है।

7. बादामों को रात को 5-6  घंटे के लिए पानी मे भिगो दें और फिर सुबह  इन्हे छील कर सफ़ेद गिरी को  घिस कर दूध में घोल कर पीने से दिमाग तेज होता है , नर्व्स मजबूत होती है। और बादाम खाने का सबसे सही तरीका यही है।

8. बादाम में मौजूद कैल्शियम और विटामिन D  हडि्डयों को मजबूत बनाते हैं। बादाम बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सबके लिए बहुत ही फायदेमंद होता है।

9. अक्सर लगातार काम करने या शरीर में पोषण की कमी से आंखें कमजोर हो जाती हैं। बादाम का सेवन आंखों के लिए भी काफी अच्छा होता है।

10. बादाम गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद होता है क्योकि बादाम में फोलिक एसिड होता है जिसके कारण माँ – बच्चे में रक्त की कमी नहीं होती है ।

Did you know that the benefits of neem seeds!

It is no secret that using neem leaves are used as drugs of various kinds. Cardiac problems, viral diseases, eye diseases, and in the treatment of diseases related to the gut is used. Many clothes and food in homes to protect from pests using neem is used as a natural insecticide. Neem seed is also very useful.

1. Skin care: Neem seed oil is generally used as a component in herbal products. This lucrative oil soaps, creams, lotions, face wash, etc. get. Because it is a natural antifungal and antiseptic, so use it as Soresis various problems related to the skin, eczema, acne, ringworm, etc. are used. Neem seed oil from your skin soft, smooth and shiny leaves. It keeps the skin healthy and free from blemishes.

2. Hair Care: the neem oil is a herbal shampoo. Neem oil shampoos great impact on the hair. Shaipu hair wash containing neem not only look beautiful but also hair loss and premature graying of hair keeps problems like. Healthy and shiny hair you can use neem oil.

3. ointment for the eyes and ears as: the use of neem seed extract ointment for the eyes and ears are used to create and drop. They have antibacterial properties which fight bacteria that cause infections in the eyes and ears helps. According to experts in the eyes and ears in the treatment of infections caused by germs and bacteria extracts made from neem seeds and drops Ointment can be used very effectively.

4. Supporting malaria prevention: Ayurvedik medicine system neem is used in the effective treatment of malaria. According to the researchers crushed neem seeds smell keeps away mosquitoes and also prevents them from laying eggs. Neem Neem tree seeds receive from the use of pure oil that prevents mosquitoes from laying eggs is the prevention of malaria.

5. Birth Control: It has been found that women and men in both Neem effectively useful for birth control. To prevent pregnancy in women using neem oil can be used as lubricants. If you are planning to start a family, you definitely should not use neem. Expectant mothers also should stay away from it.

क्‍या आप जानते हैं नीम के बीज से होने वाले ये फायदे!

इस बात में कोई राज़ नहीं है कि नीम का पत्तियों का उपयोग विभिन्न प्रकार की औषधियों के रूप में किया जाता है। हृदय से संबंधित समस्याओं, वाइरल बीमारियों, आँखों से संबंधित बीमारियों तथा आंत की बीमारियों आदि के उपचार में इनका उपयोग किया जाता है। बहुत से घरों में कपड़ों और खाद्य पदार्थों को कीटों से बचाने के लिए नीम का उपयोग प्राकृतिक कीटनाशक की तरह किया जाता है। नीम के बीज भी बहुत उपयोगी है।

1. त्वचा की देखभाल में
नीम के बीज के तेल का उपयोग सामान्यत: हर्बल उत्पादों में घटक के रूप में किया जाता है। यह लाभकारी तेल साबुन, क्रीम, लोशन, फेस वॉश आदि में मिलता है। क्योंकि यह एक प्राकृतिक एंटीफंगल और एंटीसेप्टिक है अत: इसका उपयोग त्वचा से संबंधित विभिन्न समस्याओं जैसे सोरेसिस, एक्जिमा, मुहांसे, रिंगवर्म आदि में किया जाता है। नीम के बीज के तेल से आपकी त्वचा नर्म, चिकनी और चमकदार बनती है। इससे त्वचा स्वस्थ और दाग धब्बों से मुक्त रहती है।

2. बालों की देखभाल
सामान्यत: हर्बल शैंपू में नीम का तेल होता है। नीम तेल युक्त शैंपू का बालों पर शानदार प्रभाव पड़ता है। नीम युक्त शैपू से बाल धोने पर न वे केवल सुंदर दिखते हैं बल्कि यह बालों के झड़ने और समय से पहले बालों के सफ़ेद होने जैसी समस्याओं को दूर रखता है। स्वस्थ और चमकीले बालों के लिए आप नीम के तेल का उपयोग कर सकते हैं।


3. आँखों और कानों के लिए मरहम के रूप में
नीम के बीज के सत्व का उपयोग आँखों और कानों के लिए मरहम और ड्रॉप बनाने में किया जाता है। इनमें एंटीबैक्टीरियल गुण होता है जो आँखों और कानों में संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया से लड़ने में सहायक होता है। विशेषज्ञों के अनुसार आँखों और कानों में कीटाणुओं और जीवाणुओं के कारण होने वाले संक्रमण के उपचार में नीम के बीज के सत्व से बने ड्रॉप्स और ऑइंटमेंट का उपयोग बहुत प्रभावी तरीके से किया जा सकता है।

4. मलेरिया की रोकथाम में सहायक
आयुर्वेधिक औषधि प्रणाली में मलेरिया के प्रभावी उपचार में नीम का उपयोग किया जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार नीम के पिसे हुए बीजों की दुर्गन्ध मच्छरों को दूर रखती है तथा उन्हें अंडे देने से भी रोकती है। नीम के वृक्ष के बीजों से मिलने वाले नीम के शुद्ध तेल का उपयोग मच्छरों को अंडे देने से रोकता है जिससे मलेरिया की रोकथाम होती है।

5. जन्म नियंत्रण
यह पाया गया है कि महिलाओं तथा पुरुषों दोनों में जन्म नियंत्रण के लिए नीम प्रभावी रूप से उपयोगी है। महिलाओं में गर्भावस्था को रोकने के लिए नीम के तेल का उपयोग लुब्रीकेंट के रूप में किया जा सकता है। यदि आप परिवार प्रारंभ करने की योजना बना रहे हैं तो निश्चित ही आपको नीम का उपयोग नहीं करना चाहिए। गर्भवती माओं को भी इससे दूर रहना चाहिए।

Tuesday, 5 July 2016

तरबूज के फायदे

तरबूज़ गर्मियों के मौसम के पाए जाने वाला एक बहुत ही स्वादिष्ट और लाभदायक फल है जिसमें अधिक मात्रा में विटामिन A, B, C, आयरन, मैग्नीशियम, एंटीऑक्सीडेंट और पोटैशियम पाया जाता है। गर्मियों के मौसम में ज्यादातर हमारे शरीर में पानी की कमी हो जाती है इसलिए तरबूज शरीर में पानी की कमी को पूरा करके ठंडक देता है क्योकि तरबूज में भरपूर मात्रा (92%) में पानी पाया जाता है तो आईये आज हम तरबूज से होने वाले फायदों के बारे में बात करेंगें।

1. तरबूज में विटामिन A पाया जाता है। विटामिन A की कमी से ही आंखों की सारी बीमारियां होती हैं। इसलिए आंखों की बीमारी के लिए तरबूज बहुत ही उपयोगी फल है।

2. रात को खाना खाने के बाद तरबूज़ का जूस पीने से खाना जल्दी पच जाता है और नींद भी अच्छी आती है।

3. पोलियो के रोगियों को तरबूज़ का सेवन करना बहुत लाभकारी रहता है, क्योंकि यह ख़ून को बढ़ाता है और उसे साफ भी करता है।

4. तरबूज़ के पीस पर काला नमक व काली मिर्च डालकर खाने से खट्टी डकारें आना बंद हो जाती हैं।

5. तरबूज़ उन लोगों के लिए बहुत ही फ़ायदेमंद होता है जो लोग तनाव में ज्यादा रहते हैं। तरबूज़ खाने से दिमाग शांत और खुश रहता है। जिन लोगों को गुस्सा अधिक आता है तरबूज़ खाने से उनको अपना गुस्सा कम करने में बहुत मदद मिलती है।

6. सिरदर्द होने पर आधा गिलास तरबूज़ के रस में मिश्री मिलाकर पीने से सिर दर्द में तुरंत आराम मिल जायेगा।

7. गर्मी में रोजाना तरबूज का ठंडा जूस पीने से शरीर को ठंडक तो मिलती ही है और चेहरे पर चमक भी आती है।

8. तरबूज़ के रस का पीने से से गर्मियों में लू लगने का ख़तरा कम हो जाता है।

9. तरबूज़ मोटापे को कम करने में भी बहुत सहायक होता है। क्योकि इसमे फैट नही पाया जाता है।

10. तरबूज में पाए जाने वाला विटामिन सी हमारे शरीर के प्रतिरक्षा तन्त्र को मज़बूत बनाता है , जो हमे रोगों से लड़ने में सहायता करता है।

Some old recipes for strengthening weakened body again

Parents concern for the child's health is weak. So often people troubled by the weakness of the children can be seen circling the doctor's clinic. The reason is that most of us precious treasures searched conventional synthetic drugs instead of children through strong, energetic and sharp memory to expect. Indeed, we forget the lethal effects of chemicals that sooner or later a child indulges. Referring to today's use of some traditional herbal remedies you can make your children healthy.

1. Your children roasted grams advise Chew well. Put 1-2 tablespoons of honey to drink up, it makes the body very Sfurthywan and powerful.

2. Collect the seeds of okra powder dry and feed the children. It is believed that these seeds contain protein and are better for good health. Indeed, these are extremely healthy and invigorating.

3. dang Gujarat tribal believe that children 4-4 teaspoon twice daily after food intake of grapefruit juice should be to develop the intelligence and memory. Additionally, to keep kids fit, helps.

4. Patalkot tribal amaranth or foster children's physical development and offer plenty of vegetables, as well as offer plenty of juice of its leaves. These plants are very healthy to be believed, then these tribes as well as give the body strength.

5. Eat onions and molasses Dangi tribals of Gujarat to give advice. If you've considered these tribal children eating onions and molasses should be almost every day, so that they become strong.

6. Singada provides strength to the body and blood of children increases. Water chestnut protein, fat, carbohydrates, phosphorus, iron, minerals, vitamins, starch and vital elements such as manganese are found. According to experts, children from eating raw green herbal tribal Singada draws energy from the body faster and memory is increased.

7. It is said that children's mental ability and physical strength enhances Frashbin. After a long illness when the body is weakened by half a glass of bean juice drink for seven days on the regular body strength retransmission is reached.

कमजाेर शरीर काे फिर से मजबूत बनाने वाले कुछ पुराने नुस्खे

माता-पिता के लिए बच्चों की सेहत में कमजोरी चिंता का विषय होती है। इसलिए अक्सर बच्चों की कमजोरी से परेशान लोगों को डॉक्टर के क्लिनिक के चक्कर लगाते देखा जा सकता है। इसका कारण ये है कि हम में से अधिकतर पारंपरिक अनमोल खजाने को टटोलने के बजाए बच्चों को कृत्रिम दवाओं के सहारे बलवान, ऊर्जावान और स्मरण शक्ति में तेज बनाने की अपेक्षा रखते हैं। दरअसल, हम ये भूल जाते हैं कि रासायनों के घातक प्रभाव को देर-सवेर बच्चा ही भोगता है। चलिए आज जिक्र करते हैं कुछ पारंपरिक हर्बल नुस्खों का जिनका उपयोग कर आप अपने बच्चों को सेहतमंद बना सकते हैं।

1. अपने बच्चों को भुने हुए चने को अच्छी तरह से चबाकर खाने की सलाह दें। ऊपर से 1-2 चम्मच शहद पीने के लिए कहें, यह शरीर को बहुत ही स्फूर्तिवान और शक्तिशाली बनाता है।

2. भिंडी के बीजों को एकत्र कर सुखाएं और बच्चों को इसका चूर्ण खिलाएं। माना जाता है कि ये बीज प्रोटीनयुक्त होते है और उत्तम स्वास्थ्य के लिए बेहतर हैं। दरअसल, ये बेहद गुणकारी और शक्तिवर्धक होते हैं।

3. डांग- गुजरात के आदिवासी मानते है कि बच्चों को रोजाना सुबह और शाम 4-4 चम्मच अंगूर के रस का भोजन के बाद सेवन कराया जाए तो बुद्धि और स्मरण शक्ति का विकास होता है। साथ ही, बच्चों को चुस्त दुरूस्त रखने में भी मदद करता है।

4. पातालकोट में आदिवासी बच्चों के शारीरिक विकास के लिए चौलाई या पालक की भाजी का सेवन करवाते हैं, साथ ही इसकी पत्तियों के रस का सेवन भी करवाते हैं। इन आदिवासियों की मानी जाए तो ये पौधे बहुत गुणकारी होने के साथ-साथ शरीर को शक्ति भी देते हैं।

5. प्याज और गुड़ का सेवन करने की सलाह गुजरात के डांगी आदिवासी देते है। इन आदिवासियों की मानी जाए तो बच्चों को खाने के साथ लगभग हर दिन प्याज और गुड़ दिया जाना चाहिए ताकि वे बलवान बनें।

6. सिंघाडा बच्चों के शरीर को शक्ति प्रदान करता है और खून बढ़ाता है। सिंघाड़े में प्रोटीन, वसा, कार्बोहाईड्रेट, फास्फोरस, लोहा, खनिज तत्व, विटामिन, स्टार्च और मैंग्नीज जैसे महत्वपूर्ण तत्व पाए जाते हैं। आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार कच्चे हरे सिंघाडा खाने से बच्चों के शरीर में तेजी से ऊर्जा मिलती है और स्मरण शक्ति में भी इजाफा होता है।

7. कहा जाता है कि फराशबीन बच्चों की दिमागी क्षमता व शारीरिक शक्ति को बढ़ाती है। लंबी बीमारी के बाद शरीर कमजोर हो जाने पर फलियों का आधा से एक गिलास रस नियमित रूप से सात दिनों तक पीने पर शरीर में शक्ति का पुन: संचार होने लगता है।

Ayurveda treatments may relieve constipation

Ayurveda treatments may relieve constipation

1. Avoid fried foods fried and Mirc- Msaleyukt.

2. Use more of fruits and raw vegetables, shelled pulses, gram and moong sprouts, boiled vegetables, green leafy vegetables, salads, raw spinach juice, juice Petha, Bell sherbet, orange, seasonal, citrus, mango, guava, papaya, banana, and stay.

3. Eating oatmeal or bread flour, use coarse ground.

4. Drink plenty of water, regular exercise, a daily walk away.

5. Avoid frequent tea.

6. bidi, cigarette, tobacco or do not drink beer.

7. Stay away from mental stress.

8. myrobalan powder to clean the stomach at bedtime, take a tablespoon of hot water.
You will use it constantly, even if it will not do any harm. If the constipation of other powder that may be consumed continuously by diminished gut.

9. triphala powder regularly at bedtime may take one to two tablespoons of hot water.

10. Remove four to five seeds raisins Boil a glass of milk and drink it at night. Note: Diabetics should not use it.

11. Plantago ovata husk bedtime A glass of warm milk until two to four spoons
Or dissolved in water and drink immediately. It provides relief in constipation.

12. proves beneficial in constipation eat ripe papaya.

13. orange or orange juice for breakfast, drinking sewage constantly come naturally
looks like.

आयुर्वेद उपचारों से पाए कब्ज से छुटकारा

आयुर्वेद उपचारों से पाए कब्ज से छुटकारा

1. तले भुने व मिर्च– मसालेयुक्त आहार से बचें।

2. फल व कच्ची सब्जियों का अधिक प्रयोग करें, छिलके वाली दाल, अंकुरित चने व मूंग,उबली हुई सब्जियां, हरे पत्ते वाली सब्जियां, सलाद, पालक का कच्चा रस, पेठे का रस, बेल का शर्बत, नारंगी, मौसमी, नींबू, आम, अमरूद, पपीता, केला आदि लें।

3. भोजन में दलिया या मोटे पिसे हुए आटे की रोटियों का प्रयोग करें।

4. खूब पानी पीये, नियमित व्यायाम करें, कुछ दूर तक प्रतिदिन पैदल चलें।

5. बार– बार चाय पीने से बचें।

6. बीड़ी, सिगरेट, तम्बाकू या बीयर का सेवन न करें।

7. मानसिक तनाव से दूर रहें।

8. पेट साफ करने के लिए हरड़ का चूर्ण एक चम्मच गरम पानी से रात को सोते समय ले।
यदि आप इसका लगातार प्रयोग करेंगे तो भी यह कोई नुकसान नहीं करेगी। जबकि कब्ज दूर करने वाले अन्य चूर्ण का यदि लगातार सेवन किया जाए तो उससे आंत कमजोर हो जाती है।

9. त्रिफला चूर्ण भी लगातार सोते समय एक से दो चम्मच गरम पानी के साथ ले सकते है।

10. चार से पांच मुनक्का का बीज निकालकर एक गिलास दूध में डालकर उबाल लें और रात को इसे पीये। ध्यान रहे मधुमेह के मरीज इसका प्रयोग न करे।

11. रात को सोते समय ईसबगोल की भूसी दो से चार चम्मच तक एक गिलास गरम दूध
या पानी में घोलकर तुरंत पी लें। इससे कब्ज में आराम मिलता है।

12. कब्ज में पका हुआ पपीता खाना भी लाभदायक सिद्ध होता है।

13. सुबह नाश्ते में नारंगी या संतरे का जूस लगातार पीने से मल प्राकृतिक रूप से आने
लगता है।

Benefits of Mint Leaves

Peppermint is a small plant that is green green Dar place any moisture or easily can be grown in pots. Mint more vitamin A & C, minerals, magnesium, calcium, iron, copper and potassium is found so it is very beneficial for our health. We have different kinds of mint can make delicious dishes such as chutney, raita, mint parathas etc. and we use the medicines and household remedies so as to Come today we will talk about the benefits of mint .

1. onion and mint juice on the problem of hemorrhage in the nose by inserting hemorrhage patients get relief very quickly.

2. When cholera mint, onion juice, lemon juice, mix equal amounts of feed is beneficial.

3. Any wound or poisonous insect bites by applying the juice of mint leaves get enough rest and decreases inflammation.

4. Grind the leaves of mint on the face due to the Coating heat boils, pimples and soothes acne. Dried mint leaves, you can use the powder form.

5. When the fever 8-9 mint leaves boiled in water mixed with a little sugar to her hot tea-like drink, find great comfort in doing so is fever.

6. odor coming from the mouth of mint juice mixed with water to rinse away the stench of the mouth and the mouth feel of coolness.

7. Peppermint acts like an antibiotic, when malaria fever ½ cup water 1 tablespoon lemon juice, 2 teaspoons salt Mix mint juice and black in malaria is very relieved.

8. When the problem of mouth ulcers Fahon thoroughly soaked cotton in mint juice and apply on blisters blisters heal quickly enough and he is relieved.

9. Often we continuously hiccup begins suddenly, then they become a problem when you hiccup sucking chewing mint leaves take 4-5 hiccups are relieved immediately.

10. In winter, when colds and coughs mint, pepper, cardamoms, salt and a little good mix decoction is very beneficial.
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पुदीना के फायदे

पुदीना एक हरे हरे रंग का छोटा सा पौधा होता है जिसे किसी भी नमीदार जगह या फिर गमले में भी आसानी से उगाया जा सकता है। पुदीना में अधिक मात्रा में विटामिन A & C, मिनरल्स, मैग्नीशियम, कैल्शियम, आयरन , कॉपर और पौटेशियम पाया जाता है इसलिए यह हमारे स्वास्थ के लिए बहुत ही लाभदायक होता है। पुदीना से हम अलग अलग तरह के बहुत ही स्वादिष्ट डिश बना सकते है जैसे- चटनी, रायता,परांठे आदि और हम पुदीने का प्रयोग दवाईयों और घरेलू उपचारों के रूप में करते है तो आईये आज हम पुदीने से होने वाले फायदों  के बारे में बात करेंगें।

1. नकसीर की समस्या होने पर प्याज और पुदीने का रस मिलाकर नाक में डालने से बहुत ही जल्दी नकसीर के रोगियों को आराम मिल जाता है।

2. हैजा होने पर पुदीना, प्याज का रस, नींबू का रस बराबर-बराबर मात्रा में मिलाकर पिलाने से लाभ होता है।

3. किसी घाव पर या ज़हरीले कीड़े के काटने पर पुदीने के पत्तों का रस लगाने से काफी आराम मिलता है और जलन कम हो जाती है।

4. चेहरे पर पुदीना के पत्तो को पीसकर उसका लेप लगाने से गर्मी के कारण होने वाले फोड़े, फुंसियों तथा मुहांसों में आराम मिलता है। आप पुदीने की पत्तियों को सुखाकर उनका पाउडर बनाकर भी प्रयोग सकते है।

5. बुखार हो जाने पर पुदीने की 8-9 पत्तियो को पानी में उबालकर थोड़ी चीनी मिलाकर उसे गर्म-गर्म चाय की तरह पीना चाहिए, ऐसा करने से बुखार में काफी आराम मिल जाता है।

6. मुंह में से बदबू आने पर पुदीने के रस को पानी में मिलाकर कुल्ला करने से मुंह की बदबू दूर होती है और इससे मुंह में ठंडक का भी एहसास होता है।

7. पुदीना एक एंटीबॉयटिक की तरह काम करता है, मलेरिया बुखार हो जाने पर आधा कप पानी में 1 चम्मच नींबू का रस, 2 चम्मच पुदीना का रस और काला नमक मिलाकर पीने से मलेरिया के बुखार में बहुत ही राहत मिल जाती है।

8. मुंह में छालों की समस्या हो जाने पर पुदीने के रस में रूई के फाहों को अच्छी तरह भिगोकर छाले पर लगाने से छालों में काफी राहत मिलती है और वो जल्दी ठीक हो जाते है।

9. कभी कभी हमे अचानक से लगातार हिचकी आना शुरू हो जाती है, तो जब भी आपको हिचकी की समस्या हो जाये तब पुदीने की 4-5 पत्तियों को चबाकर चूस लेने से हिचकी में तुरंत ही राहत मिल जाती है।

10. सर्दी, जुकाम और खांसी हो जाने पर पुदीना , काली मिर्च, बड़ी इलाइची, नमक और थोड़ा सा गुड मिलाकर काढ़ा बनाकर पीने से बहुत लाभ होता है।

Tinospora juice benefits

Tinospora betel leaves are like leaves. Amrita tinospora so that its name has been kept healthy. Its leaves, calcium, protein, phosphorus and starch is found in the trunk. Go about the health benefits.

1. The health benefits of tinospora

Tinospora betel leaves are like leaves. Amrita tinospora so that its name has been kept healthy. Its leaves, calcium, protein, phosphorus and starch is found in the trunk. The Vata, Kapha and is Pittnashk. Tinospora enhances the body's immunity. It also contains antibacterial and antiviral substances.

2. Turn off the anemic

Tinospora body's immune system and increases the vulnerability of the body's blood. Giloy juice twice a day for ghee or honey to the lack of blood in the body is far away.

3. Beneficial in jaundice

Tinospora intake is very beneficial in jaundice. Tinospora for a spoonful of powder, black pepper or a teaspoon of triphala powder Mix in honey is beneficial in jaundice. Grind leaves and squeeze the juice or tinospora. Mix a teaspoon of juice in the morning, drink a glass of whey cures jaundice.

4. Burning away the

Burning sensation in your feet and after a measure is of no use if you can use tinospora. It tinospora and amla juice mixed with neem leaves to make a decoction. Drink 2 to 3 times per day decoction of it ends extremities and inflammation.

5. Ear pain beneficial

Giloy juice leaves humming in the ear by inserting ear pain occurs. Grind the tinospora water 2 times a day in both ears and humming and putting Ear wax is removed.


6. Vomiting beneficial

In summer many people have the problem of vomiting. Giloy is also very beneficial for such people. Tinospora sugar or honey in the juice drink twice a day due to the heat coming from the vomiting stops.

7. Beneficial in diseases of the stomach

Tinospora Giloy juice or juice with honey cures all diseases related to the gut. Simultaneously it tinospora and grind a glass of water mixed with asparagus and cook. When this decoction should be boiled in half brew and drink it twice a day.

8. Beneficial for the eyes

Tinospora take juice mixed with amla juice is beneficial for eye diseases. Far from it, there is plenty of eye diseases, as well as eyesight, are also rising. The brew together make tinospora juice Triphala. The decoction of pepper powder and honey drink morning and evening together.

9. Reduce Obesity

Tinospora also helps in reducing obesity. Giloy and Triphala powder to reduce obesity in the morning and evening with honey stay. Or tinospora, harre, bahera, and Amla combined together shilaajeet cook and drink this decoction. The regular intake of obesity stops.

गिलोय रस के फायदे

गिलोय के पत्ते पान के पत्ते की तरह होते हैं। गिलोय इतनी गुणकारी है कि इसका नाम अमृता रखा गया है। इसकी पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन, फास्‍फोरस और तने में स्टार्च पाया जाता है। इसके स्‍वास्‍थ्‍य लाभों के बारे में जाने

1.गिलोय के स्वास्थ्य लाभ

गिलोय के पत्ते पान के पत्ते की तरह होते हैं। गिलोय इतनी गुणकारी है कि इसका नाम अमृता रखा गया है। इसकी पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन, फास्‍फोरस और तने में स्टार्च पाया जाता है। यह वात, कफ और पित्तनाशक होती है। गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। साथ ही इसमें एंटीबायोटिक और एंटीवायरल तत्‍व भी होते है।

2. खून की कमी दूर करें

गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और शरीर में खून की कमी को दूर करता है। इसके लिए प्रतिदिन सुबह-शाम गिलोय का रस घी या शहद मिलाकर सेवन करने से शरीर में खून की कमी दूर होती है।

3.पीलिया में फायदेमंद

गिलोय का सेवन पीलिया रोग में भी बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए गिलोय का एक चम्मच चूर्ण, काली मिर्च अथवा त्रिफला का एक चम्मच चूर्ण शहद में मिलाकर चाटने से पीलिया रोग में लाभ होता है। या गिलोय के पत्तों को पीसकर उसका रस निकाल लें। एक चम्‍मच रस को एक गिलास मट्ठे में मिलाकर सुबह-सुबह पीने से पीलिया ठीक हो जाता है।

4.जलन दूर करें

अगर आपके पैरों में जलन होती है और बहुत उपाय करने के बाद भी आपको कोई फायदा नहीं हो रहा है तो आप गिलोय का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए गिलोय के रस को नीम के पत्ते एवं आंवला के साथ मिलाकर काढ़ा बना लें। प्रतिदिन 2 से 3 बार इस काढ़े का सेवन करें इससे हाथ पैरों और शरीर की जलन दूर हो जाती है।

5.कान दर्द में लाभकारी

गिलोय के पत्तों के रस को गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक होता है। साथ ही गिलोय को पानी में घिसकर और गुनगुना करके दोनों कानों में दिन में 2 बार डालने से कान का मैल निकल जाता है।


6.उल्टियां में फायदेमंद

गर्मियों में कई लोगों को उल्‍टी की समस्‍या होती हैं। ऐसे लोगों के लिए भी गिलोय बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए गिलोय के रस में मिश्री या शहद मिलाकर दिन में दो बार पीने से गर्मी के कारण से आ रही उल्टी रूक जाती है।

7.पेट के रोगों में लाभकारी

गिलोय के रस या गिलोय के रस में शहद मिलाकर सेवन करने से पेट से संबंधित सभी रोग ठीक हो जाते है। इसके साथ ही आप गिलोय और शतावरी को साथ पीस कर एक गिलास पानी में मिलाकर पकाएं। जब उबाल कर काढ़ा आधा रह जाये तो इस काढ़े को सुबह-शाम पीयें।

8.आंखों के लिए फायदेमंद

गिलोय का रस आंवले के रस के साथ मिलाकर लेना आंखों के रोगों के लिए लाभकारी होता है। इसके सेवन से आंखों के रोगों तो दूर होते ही है, साथ ही आंखों की रोशनी भी बढ़ती हैं। इसके लिए गिलोय के रस में त्रिफला को मिलाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े में पीपल का चूर्ण और शहद मिलकर सुबह-शाम सेवन करें।


9. मोटापा कम करें

गिलोय मोटापा कम करने में भी मदद करता है। मोटापा कम करने के लिए गिलोय और त्रिफला चूर्ण को सुबह और शाम शहद के साथ लें। या गिलोय, हरड़, बहेड़ा, और आंवला मिला कर काढ़ा बनाकर इसमें शिलाजीत मिलाकर पकाएं और सेवन करें। इस का नियमित सेवन से मोटापा रुक जाता है।

Monday, 4 July 2016

Home remedy for osteoporosis

Osteoporosis is a problem in which the bone is reduced BMD levels, which increases the risk of fractures. In osteoporosis, bones become weak and thin or decayed.

Our bones are made up of various minerals, which tend to subside with age. Sometimes bones are so weak that even a slight injury break.

Osteoporosis protein, vitamin D and calcium deficiency and for women, it is because there are more patient.
Let us show you how you can avoid osteoporosis domestic adopting you.

Home remedy for osteoporosis

Pruns

Pruns ie dried plums, are eating away osteoporosis. Pruns polyphenols present in the bones that make up the loss. Not only are Pruns boron minerals such as copper and minerals are important for the bones.

Apple

As well as anti-oxidant polyphenols in apples and Flevnoids is also reducing the inflammation of the bones, increases their density. So make a habit of eating an apple a day.

coconut oil

According to experts, the inclusion of coconut oil to your diet increases bone density. It is also the lack of estrogen. Antioxidant compounds present in coconut oil reserve at the bone structure.

Almond Milk

Almond milk is a high volume of derbyshire. So almond milk a good treatment of osteoporosis. The essential ingredients for almond milk bones, magnesium, manganese and potassium are also included. The Daily Sip a glass of almond milk regularly.

Sesame seeds

Sesame seeds in your diet to include osteoporosis ends. Sesame also contains high amounts of calcium, which is the most essential nutrient for bone health. At the same mole magnesium, phosphorous, manganese, copper, zinc and vitamin D are. Treatment for chewing a handful roasted sesame milk drink. In addition to food can be eaten roasted, add up to Tilo.

Pineapple

Manganese is essential to prevent osteoporosis include pineapple. Manganese deficiency and reduced bone density bones to become thinner, so it is a lack of manganese by eating pineapple. Treatment before eating a cup everyday to eat pineapple. Besides pineapple juice can be drunk.

Coriander seeds

Coriander leaves and seeds in both magnesium, iron, calcium, potassium and manganese, etc. nutrients. Coriander seeds boiled in hot water, cover and hold for a while after that to stay warm drink of honey in it. Food condiment coriander seeds also can be used. Use of green coriander chutney cooking and should form.

Also Try

Include regular exercise routine.

Increase the amount of calcium-rich food. Milk, yogurt, cheese, etc., included in the
Please.

Essential fatty acids must be included in the food.

Do not smoking and alcohol intake.

Avoid canned food.

The amount of caffeine, such as tea, coffee and other drinks to reduce energy drink.

ऑस्टियोपोरोसिस के लिए घरेलू नुस्ख़े

ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों में होने वाली समस्या है, जिसमें हड्डियों का बीएमडी लेवल कम हो जाता है, जिससे हड्डियों के टूटने का खतरा बढ़ जाता है। ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां पतली या खोखली होकर कमजोर हो जाती हैं।

हमारी हड्डियां कई तरह के मिनरल से मिलकर बनी होती हैं, जो कि उम्र के साथ कम होने लगते हैं। कई बार तो हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि मामूली सी चोट से भी टूट जाती हैं।

ऑस्टियोपोरोसिस प्रोटीन, विटामिन डी और कैल्शियम की कमी की वजह से होता है और महिलाएं इसकी ज्यादा रोगी मिलती हैं।
आइए आपको बताते हैं कि किस तरह घरेलू उपायों को अपनाकर आप ऑस्टियोपोरोसिस से बच सकती हैं।

ऑस्टियोपोरोसिस के लिए घरेलू नुस्ख़े

प्रून्स

प्रून्स यानि सूखे प्लम, खाने से हड्डियों की कमजोरी दूर होती है। प्रून्स में मौजूद पोलीफिनोल्स  हड्डियों  को हुए नुकसान की भरपाई करता है। इतना ही नहीं प्रून्स में बोरान और तांबा जैसे खनिज होते हैं जो कि हड्डियों के लिए जरूरी खनिजों में शामिल हैं।

सेब

सेब में पोलीफिनोल्स और फ्लेवनोइड्स के साथ ही एंटी ऑक्सीडेंट भी होता है जो कि हड्डियों की सूजन को कम करके उनके घनत्व को बढ़ाता है। इसलिए रोज एक सेब खाने की आदत बनाएं।

नारियल का तेल

एक्सपर्ट की मानें तो अपने आहार नारियल तेल को शामिल करने से हड्डियों  का घनत्व बढ़ता है। साथ ही एस्ट्रोजन की कमी भी पूरी होती है। नारियल के तेल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट यौगिक हड्डियों के ढांचे को सुरक्षित रखते हैं।

बादाम का दूध

बादाम के दूध में कैल्श्यिम की उच्च मात्रा होती है। इसलिए बादाम का दूध ऑस्टियोपोरोसिस के बेहद अच्छा उपचार है। बादाम के दूध में हड्डियों के लिए जरूरी तत्व मैग्नीशियम,  मैगनीज और पौटेशियम भी शामिल होते हैं। ऐसे में रोज एक गिलास बादाम वाला दूध नियमित रूप से पीएं।

तिल के बीज

अपने भोजन में तिल के बीज शामिल करने से हड्डियों की कमजोरी दूर होती है। तिल में भी कैल्शियम की उच्च मात्रा होती है, जो कि हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए सबसे जरूरी पोषक तत्व है। इसके साथ ही तिल में मैग्नीशियम,  फॉस्फोरस,  मैंगनीज,  तांबा,  जस्ता और विटामिन डी भी होता है। उपचार के लिए एक मुट्ठी भुने हुए तिल चबा कर दूध पीएं। इसके अलावा खाने बनाने में भी भुने हुए तिलों को ऊपर से डालकर खाया जा सकता है।

अनानास

अनानास में ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने के लिए जरूरी मैंगनीज शामिल है। मैंगनीज की कमी से हड्डियों का घनत्व कम और हड्डियां पतली हो सकती हैं, ऐसे में अनानास खाने से मैंगनीज की कमी पूरी होती है। उपचार के लिए हर रोज खाना खाने से पहले एक कप अनानास को खाएं। इसके साथ ही अनानास का जूस भी पिया जा सकता है।

धनिया के बीज

धनिया के पत्ते और बीज दोनों में ही मैग्नीशियम,  आयरन,  कैल्शियम,  पोटेशियम और मैंगनीज आदि पोषक तत्व होते हैं। धनिया के बीजों को गरम पानी में उबालकर कुछ देर ढक कर रखें उसके बाद गुनगुना रहने पर उसमे शहद मिलाकर पीएं। खाने के छौंक में भी धनिया के बीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हरे धनिया का इस्तेमाल भी खाना बनाने और चटनी के रूप में करना चाहिए।

इन्हें भी आजमाएं

नियमित रूप से व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करें।

कैल्शियमयुक्त खाने की मात्रा बढ़ाएं। जिसमें दूध,  दही, पनीर आदि को खाने में शामिल
करें।

आवश्यक फैटी एसिड भी खाने में शामिल किया जाना जरूरी है।

धूम्रपान और शराब का सेवन न करें।

डिब्बाबंद खाने से बचें।

कैफीन की मात्रा, जैसे चाय, कॉफी और अन्य एनर्जी पेय को कम पीएं।

To prevent exhaustion of domestic remedies

Paced modern life and the stress of many, not only physically but also mentally individual tire. Everyone is tired, but many people complain of pain in the body. To reduce the pain people often take Painkiller. These drugs relax immediately, but long-term use can damage it.

Here's to prevent exhaustion of domestic remedies

1. Green Tea  - to overcome exhaustion drink a cup of green tea is very effective. Regularly drinking green tea in weight control remains. Muscle pain when the green tea is extremely beneficial.

2. ginger tea - Ginger tea acts as a natural Painkiller. This person also keeps fresh. Combined decoction of Tulsi Ginger can be consumed.

3. fennel  - as well as a flavor enhancer in a dish fennel bring breathe Tajaghi is also highly effective. Anise is definitely in the kitchen. Fennel stomach is cleared and you feel energized.

4. parsley  - oregano also work like a painkiller. This part of the body to repair the broken-Fute and joint pain are very beneficial

5. Pumpkin Seeds  - Pumpkin seed is magnesium, which helps to fight lethargy and exhaustion. Half an hour of exercise if you feel tired, then that means you are magnesium deficient. For the manufacture of magnesium in the body during exercise, oxygen is required. The reduction is due to early exhaustion.

6. Walnut  - omega 3 fatty acids are found in walnuts. Omega 3 fatty acids not only gives relief from fatigue and laziness, but it also prevents depression. So by eating walnuts will solve the problem of your Jpakion.

7. Cereal (Whole grain) - cereals that are high in fiber. Therefore, it is helpful in relaxation and laziness. Complex carbohydrates in grains (complex carbohydrate) occur. These are helpful in fighting fatigue.

8. Cayenne - Vitamin C is found in cayenne, which removes fatigue. Cayenne is the brain active and we always feel refreshed.

9. yoghurt - the good bacteria in yogurt digestive system (immune system) are strong. Eaten twice a day for 4 weeks, if the yogurt with the physical and mental health and resistance to disease is also rising, there is less fatigue.

थकावट से बचाव के लिए घरेलू नुस्खे

भागदौड़ भरी आधुनिक जिंदगी और कई तरह के तनाव, न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी व्यक्ति को थका देते हैं। थकावट हर किसी को होती है परन्तु कई लोगों को पूरे शरीर में दर्द की शिकायत रहती है। दर्द को कम करने के लिए लोग अकसर पेनकिलर ले लेते हैं। ये दवाएं तुंरत आराम देती हैं परन्तु लम्बे समय तक इसका प्रयोग नुकसान पहुंचा सकता है।

आइए जानें थकावट से बचाव के लिए घरेलू नुस्खे

1. ग्रीन टी - थकावट को दूर करने के लिए एक कप ग्रीन टी पीना बेहद प्रभावी है। नियमित रूप से ग्रीन टी पीने से वजन भी कंट्रोल में रहता है। मांसपेशियों में दर्द होने पर आप ग्रीन टी बेहद लाभकारी है।

2. अदरक की चाय - अदरक की चाय कुदरती पेनकिलर के रूप में कार्य करती है। यह व्यक्ति को तरोताजा भी महसूस कराती है। तुलसी के काढ़े में अदरक मिलाकर भी पीया जा सकता है।

3. सौंफ - किसी पकवान में स्वाद बढ़ाने के साथ ही सौंफ सांस में ताजग़ी लाने में भी बेहद प्रभावकारी है। सौंफ का प्रयोग रसोई में ज़रूर होता है। सौंफ खाने से पेट साफ़ रहता है और आप खुद को तरोताजा महसूस करते है।

4. अजवायन - अजवायन के पत्ते भी दर्द निवारक दवा की तरह काम करते हैं। यह शरीर के टूटे-फुटे की अंग की मरम्मत करने और जोड़ों के दर्द में बहुत लाभप्रद होते हैं

5. कद्दू के बीज - कद्दू के बीज में मैग्नीशियम होता है, जो आलस व थकावट से लड़ने में मदद करता है। आधे घंटे की एक्सरसाइज में अगर आप थका हुआ महसूस करती हैं तो इसका मतलब है कि आपमें मैग्नीशियम की कमी है। व्यायाम के दौरान शरीर में ऑक्सीजन के निर्माण के लिए मैग्नीशियम जरूरी है। इसकी कमी की वजह से थकावट जल्दी होती है।

6. अखरोट - अखरोट में ओमेगा 3 फैटी एसिड पाया जाता है। ओमेगा 3 फैटी एसिड न केवल थकान और आलस से राहत देता है, बल्कि यह अवसाद से भी बचाता है। इसलिए अखरोट खाने से आपकी झपकियों की समस्या दूर होगी।

7. अनाज - अनाज में फाइबर की मात्रा अधिक होती है। इसलिए आलस और थकान मिटाने में यह मददगार साबित होता है। अनाज में कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट होते हैं। ये थकान से लड़ने में मददगार होते हैं।

8. लाल मिर्च - लाल मिर्च में विटामिन सी पाया जाता है, जो थकान दूर करता है। लाल मिर्च से दिमाग एक्टिव रहता है और हम हमेशा तरोताजा महसूस करते हैं।

9. दही - दही में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया पाचन तंत्र को मजबूत रखते हैं। 4 सप्ताह तक दिन में दो बार यदि दही खाया जाए तो शारीरिक औरमानसिक सेहत के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है और थकान कम होती है।

Domestic measures to control high blood pressure

High blood pressure is a very common problem in today's time is primarily due to the stress and high blood pressure, obesity, irregular routine, anger etc. High blood pressure can be affected at any time today, the symptoms appear, such as dizziness, insomnia, heart rate go higher, heaviness in the head stay, loss of appetite, restlessness, etc. remain. Today we ask you to control your blood pressure will talk about some home remedies without any side effects of the high blood pressure can easily control.

Domestic measures to control high blood pressure

1. salt to high blood pressure is a main material of the high blood pressure patients should reduce the amount of salt in food.

2. Patients with high blood pressure early in the morning for about 15-20 minutes a day on the green grass barefoot walk on the grass is extremely profitable.

3. Grind the bud of garlic every morning to lick the food to control high blood pressure benefit

4. High blood pressure patients to eat ripe papaya is very beneficial, you can eat papaya after meals.

5. High blood pressure to a normal cup of tomato juice or carrot juice 1 tablespoon honey drink in high blood pressure is relieved.

6. The patient of high blood pressure should be consumed in large quantities of radishes and radish leaves soft chew Chew also brings many benefits.

7. Indian gooseberry jam, chutney Aanvle, Amla powder material is useful in high blood pressure by eating.

8. Fli gourd and drumstick high blood pressure for the patient is much more beneficial to the patient, these two vegetables to include in their daily diet.

9. The problem of high blood pressure is a teaspoon of triphala powder with hot water before going to sleep at night taking considerable advantage.

10. In patients with high blood pressure 4 basil leaves and neem leaves 2 short
Grind with water empty stomach every morning for about 1 week to get relief from high blood pressure.

Sunday, 3 July 2016

हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के घरेलू उपाय

हाई ब्लड प्रेशर आज के समय की एक बहुत ही आम समस्या हो गयी है और हाई ब्लड प्रेशर होने का मुख्य कारण तनाव, मोटापा, अनियमित दिनचर्या, क्रोध आदि। हाई ब्लड प्रेशर से आज में समय में कोई भी प्रभावित हो सकता है, इसके लक्षण इस प्रकार दिखाई देते है जैसे- चक्कर आना, अनिद्रा, हार्ट बीट ज्यादा हो जाना, सिर में भारीपन रहना, भूख न लगना, बैचेनी रहना आदि। आज हम आपसे हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए कुछ घरेलू नुस्खों के बारे में बात करेंगें जिससे आप हाई ब्लड प्रेशर को बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के आसानी से कंट्रोल कर सकते है।

हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के घरेलू उपाय

1. नमक ब्लड प्रेशर को हाई करने वाली एक मुख्य सामग्री होती है इसलिए हाई ब्लड प्रेशर वाले रोगी को भोजन से नमक की मात्रा कम कर देनी चाहिए।

2. हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों को सुबह सुबह करीब 15-20 मिनट हरी घास पर नंगे पैर हरी घास पर रोजाना चलना बेहद लाभदायक होता है।

3. लहसुन की एक कली को बारीक पीसकर रोज सुबह चाटकर खाने से हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में लाभ होता है

4. हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिये पका हुआ पपीता खाना भी काफी फायदेमंद होता है, आप पपीते को खाना खाने के बाद खा सकते है।

5. हाई ब्लड प्रेशर को नॉर्मल करने के लिये एक कप टमाटर के रस या फिर गाजर के रस में 1 चम्मच शहद मिलाकर पीने से हाई ब्लड प्रेशर में आराम मिल जाता है।

6. हाई ब्लडप्रेशर के रोगी को मूली का सेवन अधिक मात्रा में करना चाहिये और मूली के मुलायम पत्तो को चबा चबाकर खाने से भी बहुत लाभ होता है।

7. आंवले का मुरब्बा, आँवले की चटनी, आँवला पाउडर आदि सामग्री खाने से हाई ब्लड प्रेशर में लाभ होता है।

8. करेला और सहजन की फ़ली हाई ब्लड प्रेशर के रोगी के लिये बहुत अधिक फायदेमंद होती है इसलिए इन दोनों सब्जियों को रोगी अपनी रोजाना की डाइट में जरूर शामिल करें।

9. हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होने पर एक चम्मच त्रिफला चूर्ण को रात में सोने से पहले गर्म पानी के साथ लेने से काफी लाभ मिलता है।

10. हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों को 4 तुलसी की पत्ती और 2 नीम की पत्तियों को थोड़े
पानी के साथ पीसकर रोजाना सुबह करीब 1 हफ्ते तक खाली पेट पीने से हाई ब्लड प्रेशर से आराम मिल जाता है।

Benefits of Lychee

Lychee in a very tasty and profitable summer fruit stand is called the queen of fruits. Large amount of elements such as lychee healthy vitamins, potassium, carbohydrates, magnesium, phosphorus, minerals and iron etc. are found, the nature of lychee is therefore considered very cool in the summer months, especially since it must be taken its use is not the problem of dehydration in the body Come today we will talk about the benefits of lychee.

Benefits of Lychee

1. Fiber is found in high amounts in lychee, which is helpful in reducing obesity substantially. Lychee is also making use of our digestive system is not the problem of constipation.

2. Use lots of lychee and lychee beauty tips are also eating the skin of the face seems to glow from inside.

3. lychee with a very tasty fruit juices which are considered Taseer is very cold, the heat, like lychee overcome such problems and also provides access to the body quite cool.

4. This is an advantage because the best litchi eat a very low amount of calories, so weight gain is not too troublesome.

5. The lychee is a very good source of energy in the body is considered to be so tired and weak, because it is quite beneficial when consumed litchi lychee meal you start feeling energetic.

6. lychee overdose Healthy elements for children's growth, which is considered very important.

7. Vitamin C is plentiful in lychee, litchi are also found in the cancer-fighting properties. Not the growth of cancer cells by eating it regularly receives.


8. litchi using our immunity system becomes too strong to help us fight disease is different.

लीची के फायदे

लीची एक बहुत ही स्वादिष्ट और लाभदायक गर्मियों के दिनों में मिलने वाला फल है जिसे फलों की रानी भी कहा जाता है। लीची में अधिक मात्रा में पौषक तत्व जैसे- विटामिन, पौटेशियम, कार्बोहाइड्रेट, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, मिनरल्स और आयरन आदि पाये जाते है, लीची की प्रकृति बहुत ही ठंडी मानी जाती है इसलिये गर्मियों के दिनों में विशेष रूप से इसका सेवन करना करना चाहिये क्योंकि इसके प्रयोग से शरीर में डिहाइड्रेशन की समस्या नहीं होती है तो आईये आज हम आपसे लीची से होने वाले फायदों के बारे में बात करेंगें।

लीची के फायदे-
1. लीची में अधिक मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो मोटापे को काफी हद तक कम करने में सहायक होता है। लीची के प्रयोग से हमारा पाचन तंत्र भी अच्छा रहता है जिससे कब्ज की समस्या नहीं होती है।

2. लीची का इस्तेमाल बहुत से ब्यूटी टिप्स लिये भी किया जाता है और लीची खाने से चेहरे की त्वचा अंदरूनी रूप से ग्लो करने लगती है।

3. लीची एक बहुत ही रस वाला स्वादिष्ट फल है जिसकी तासीर बहुत ही ठंडी मानी जाती है, लीची गर्मी में होने वाली तरह तरह की समस्याओं को दूर करती है और शरीर को काफी ठंडक भी पहुंचाती है।

4. लीची खाने का सबसे अच्‍छा एक फायदा यह होता है क्योकि इसमें बहुत ही कम मात्रा में कैलोरी होती है जिससे वजन बढ़ने की भी परेशानी नहीं होती है।

5. लीची को ऊर्जा का एक बहुत ही अच्छा स्रोत माना जाता है इसलिये शरीर में थकान और कमजोरी हो जाने पर लीची का सेवन काफी फायदेमंद होता है इसलिए लीची खाने से आप ऊर्जावान महसूस करने लगते हैं।

6. लीची में अधिक मात्रा पौषक तत्व होते है जो बच्चों की वृद्धि के लिये बहुत ही आवश्यक माने जाते है।

7. लीची में भरपूर मात्रा में विटामिन सी होता है, लीची में कैंसर से लड़ने के गुण भी पाये जाते हैं। इसे रोजाना खाने से कैंसर सेल की वृद्धि नही हो पाती है।

8. लीची के प्रयोग से हमारा इम्युनिटी सिस्टम भी मजबूत हो जाता है जिससे हमें विभिन्न तरह के रोगों से लड़ने में सहायता मिल जाती है।

मंढीप बाबा शिवलिंग दर्शन के लिए पार करनी पड़ती है एक ही नदी 16 बार

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में घनघोर जंगलों के बीच गुफा में एक शिवलिंग स्थापित है, जिसे लोग मंढीप बाबा के नाम से जानते हैं। निर्जन स्थान में गुफा के ढा़ई सौ मीटर अंदर उस शिवलिंग को किसने और कब स्थापित किया यह कोई नहीं जानता। कहा जाता है कि वहां बाबा स्वयं प्रकट हुए हैं। यानी शिवलिंग का निर्माण प्राकृतिक रूप से हुआ है ।

राजनांदगांव-कवर्धा मुख्य मार्ग पर स्थित गंडई से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है मंढीप गुफा। लेकिन यहां बाबा के दर्शन करने का मौका साल में एक ही दिन मिल सकता है, अक्षय तृतीया के बाद पड़ने वाले पहले सोमवार को। दिलचस्प बात ये है कि वहां जाने के लिए एक ही नदी को 16 बार लांघना पड़ता है। यह कोई अंधविश्वास नहीं है, बल्कि वहां जाने का रास्ता ही इतना घुमावदार है कि वह नदी रास्ते में 16 बार आती है।

साल में एक ही बार जाने के पीछे पुरानी परंपरा के अलावा कुछ व्यवहारिक कठिनाइयां भी हैं। बरसात में गुफा में पानी भर जाता है, जबकि ठंड के मौसम में खेती-किसानी में लोग वहां नहीं जाते। रास्ता भी इतना दुर्गम है कि सात-आठ किलोमीटर का सफर तय करने में घंटो लग जाते है। उसके बाद पैदल चलते समय पहले पहाड़ी पर चढ़ना पड़ता है और फिर उतरना, तब जाकर गुफा का दरवाजा मिलता है। यह घोर नक्सल इलाके में पड़ता है, इसलिए भी आम दिनों में लोग इधर नहीं आते ।

हर साल अक्षय तृतीया के बाद पड़ने वाले पहले सोमवार के दिन गुफा के पास इलाके के हजारों लोग जुटते हैं। परंपरानुसार सबसे पहले ठाकुर टोला राजवंश के लोग पूजा करने के बाद गुफा में प्रवेश करते हैं। उसके बाद आम दर्शनार्थियों को प्रवेश करने का मौका मिलता है। गुफा के डेढ़-दो फीट के रास्ते में घुप अंधेरा रहता है। लोग काफी कठिनाई से रौशनी कीव्यवस्था साथ लेकर बाबा के दर्शन के लिए अंदर पहुंचते हैं। गुफा में एक साथ 500-600 लोग प्रवेश कर जाते हैं ।

गुफा के अंदर जाने के बाद उसकी कई शाखाएं मिलती हैं, इसलिए अनजान आदमी को भटक जाने का डर बना रहता है। ऐसा होने के बाद शिवलिंग तक पहुंचने में चार-पांच घंटे का समय लग जाता है ।

स्थानीय महंत राधा मोहन वैष्णव का कहना है मैकल पर्वत पर स्थित इस गुफा का एक छोर अमरकंटक में है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आज तक कोई वहां तक नहीं पहुंच पाया है, लेकिन बहुत पहले पानी के रास्ते एक कुत्ता छोड़ा गया था, जो अमरकंटक में निकला। अमरकंट यहां से करीब पांच सौ किलोमीटर दूर है.

कैसे हुई गरुड़ और नागों की उत्पत्ति और कैसे बने गरुड़ विष्णु के वाहन ?

आज हम आपको एक पौराणिक कथा बता रहे है जिसका वर्णन महाभारत के आदि पर्व में मिलता है। यह कथा बताती है की इस धरती पर गरुड़ और नागों की उत्पत्ति कैसे हुई, क्यों गरुड़ नाग के दुशमन हुए, क्यों नागो की जीभ आगे से दो हिस्सों में बटी हुई है और कैसे गरुड़, भगवान विष्णु के वाहन बने ?

महर्षि कश्यप की तेरह पत्नियां थी। लेकिन विनता और कद्रू नामक अपनी दो पत्नियों से वे विशेष प्रेम करते थे। एक दिन महर्षि जब आनंद भाव में बैठे थे तो उनकी दोनों पत्नियां उनके समीप पहुंची और पति के पांव दबाने लगी।  प्रसन्न होकर महर्षि ने बारी-बारी से दोनों को सम्बोधित किया- “तुम दोनों ही मुझे विशेष प्रिय हो। तुम्हारी कोई इच्छा हो तो बताओ।” फिर महर्षि ने विनता से पूछा। विनता ने कहा- “मैं भी माँ बनना चाहती हूं स्वामी ! किन्तु हजार पुत्रो की नहीं, बल्कि सिर्फ एक ही पुत्र की। लेकिन मेरा पुत्र इतना बलवान हो कि कद्रू के हजार पुत्र भी उसकी बराबरी न कर सके।”

महर्षि बोले- “शीघ्र ही मैं एक यज्ञ करने वाला हूं। यज्ञोपरांत तुम दोनों की माँ बनने की इच्छाएं अवश्य पूरी होगी।”
महर्षि कश्यप ने यज्ञ किया। देवता और ऋषि-मुनियों ने सहर्ष यज्ञ में हिस्सा लिया। यज्ञ सम्पूर्ण करके महर्षि कश्यप पुनः तपस्या करने चले गए। कुछ माह पश्चात विनता ने दो तथा कद्रु ने एक हजार अंडे दिए। कुछ काल के पश्चात कद्रु ने अपने अंडे फोड़े तो उनमे से काले नागों के बच्चे निकल पड़े। कद्रु ने ख़ुशी से चहकते हुए विनता को पुकारा- “विनता ! देखो तो मेरे अन्डो से कितने प्यारे बच्चे बाहर निकले है।”

विनता बोली- “सचमुच बहुत खूबसूरत है कद्रू ! बधाई हो, अब मैं भी अपने दोनों अंडो को फोड़कर देखती हूं।”यह कहकर विनता अपने दोनों अंडो के पास गई। उसने एक अंडा फोड़ दिया, लेकिन अंडे के अंदर से एक बच्चे का आधा बना शरीर देखकर वह सहम गई। बोली- “हे भगवान ! जल्दीबाजी में मैने ये क्या कर डाला। यह बच्चा तो अभी अपूर्ण है।”
तभी फूटे हुए अंडे के अंदर से बालक बोल पड़ा- “जल्दबाजी में अंडा फोड़कर तुमने बहुत बड़ा अपराध कर डाला है। फलस्वरूप तुम्हे कुछ समय तक दासता करनी होगी।”
विनता बोली- “अपराध तो मुझसे हो ही गया। लेकिन इसका निराकरण कैसे होगा पुत्र ?”अपूर्ण बालक बोला-“दूसरे अंडे को फोड़ने में जल्दबाजी मत करना। यदि तुमने ऐसा किया तो जीवन भर दासता से मुक्त नहीं हो पाओगी। क्योंकि उसी अंडे से पैदा होने वाला तुम्हारा पुत्र तुम्हे दासता से मुक्ति दिलाएगा।”

इतना कहकर अंडे से उत्पन्न अपूर्ण बालक आकाश में उड़ गया और विनता दूसरे अंडे के पकने तक इंतजार करने लगी। समय पाकर अंडा फूटा और उसमे से एक महान तेजस्वी बालक उत्पन्न हुआ, जिसका नाम गरुड़ रखा गया। गरुड़ दिन-प्रतिदिन बड़ा होने लगा और कद्रू के हजार पुत्रों पर भारी पड़ने लगा। परिणामस्वरूप विनता और कद्रू के संबंध दिन-प्रतिदिन कटु से कटुतर होते गए।

फिर एक दिन जब विनता और कद्रू भृमण कर रही थी। कद्रू ने सागर के किनारे दूर खड़े सफेद घोड़े को देखकर विनता से कहा- “बता सकती हो विनता ! दूर खड़ा वह घोडा किस रंग का है ?”

आज हम आपको एक पौराणिक कथा बता रहे है जिसका वर्णन महाभारत के आदि पर्व में मिलता है। यह कथा बताती है की इस धरती पर गरुड़ और नागों की उत्पत्ति कैसे हुई, क्यों गरुड़ नाग के दुशमन हुए, क्यों नागो की जीभ आगे से दो हिस्सों में बटी हुई है और कैसे गरुड़, भगवान विष्णु के वाहन बने ?
महर्षि कश्यप की तेरह पत्नियां थी। लेकिन विनता और कद्रू नामक अपनी दो पत्नियों से वे विशेष प्रेम करते थे। एक दिन महर्षि जब आनंद भाव में बैठे थे तो उनकी दोनों पत्नियां उनके समीप पहुंची और पति के पांव दबाने लगी।  प्रसन्न होकर महर्षि ने बारी-बारी से दोनों को सम्बोधित किया- “तुम दोनों ही मुझे विशेष प्रिय हो। तुम्हारी कोई इच्छा हो तो बताओ।”
फिर महर्षि ने विनता से पूछा। विनता ने कहा- “मैं भी माँ बनना चाहती हूं स्वामी ! किन्तु हजार पुत्रो की नहीं, बल्कि सिर्फ एक ही पुत्र की। लेकिन मेरा पुत्र इतना बलवान हो कि कद्रू के हजार पुत्र भी उसकी बराबरी न कर सके।”
महर्षि बोले- “शीघ्र ही मैं एक यज्ञ करने वाला हूं। यज्ञोपरांत तुम दोनों की माँ बनने की इच्छाएं अवश्य पूरी होगी।” महर्षि कश्यप ने यज्ञ किया। देवता और ऋषि-मुनियों ने सहर्ष यज्ञ में हिस्सा लिया। यज्ञ सम्पूर्ण करके महर्षि कश्यप पुनः तपस्या करने चले गए। कुछ माह पश्चात विनता ने दो तथा कद्रु ने एक हजार अंडे दिए। कुछ काल के पश्चात कद्रु ने अपने अंडे फोड़े तो उनमे से काले नागों के बच्चे निकल पड़े। कद्रु ने ख़ुशी से चहकते हुए विनता को पुकारा- “विनता ! देखो तो मेरे अन्डो से कितने प्यारे बच्चे बाहर निकले है।”

विनता बोली- “सचमुच बहुत खूबसूरत है कद्रू ! बधाई हो, अब मैं भी अपने दोनों अंडो को फोड़कर देखती हूं।”यह कहकर विनता अपने दोनों अंडो के पास गई। उसने एक अंडा फोड़ दिया, लेकिन अंडे के अंदर से एक बच्चे का आधा बना शरीर देखकर वह सहम गई। बोली- “हे भगवान ! जल्दीबाजी में मैने ये क्या कर डाला। यह बच्चा तो अभी अपूर्ण है।”
तभी फूटे हुए अंडे के अंदर से बालक बोल पड़ा- “जल्दबाजी में अंडा फोड़कर तुमने बहुत बड़ा अपराध कर डाला है। फलस्वरूप तुम्हे कुछ समय तक दासता करनी होगी।”
विनता बोली- “अपराध तो मुझसे हो ही गया। लेकिन इसका निराकरण कैसे होगा पुत्र ?”अपूर्ण बालक बोला-“दूसरे अंडे को फोड़ने में जल्दबाजी मत करना। यदि तुमने ऐसा किया तो जीवन भर दासता से मुक्त नहीं हो पाओगी। क्योंकि उसी अंडे से पैदा होने वाला तुम्हारा पुत्र तुम्हे दासता से मुक्ति दिलाएगा।”

इतना कहकर अंडे से उत्पन्न अपूर्ण बालक आकाश में उड़ गया और विनता दूसरे अंडे के पकने तक इंतजार करने लगी। समय पाकर अंडा फूटा और उसमे से एक महान तेजस्वी बालक उत्पन्न हुआ, जिसका नाम गरुड़ रखा गया। गरुड़ दिन-प्रतिदिन बड़ा होने लगा और कद्रू के हजार पुत्रों पर भारी पड़ने लगा। परिणामस्वरूप विनता और कद्रू के संबंध दिन-प्रतिदिन कटु से कटुतर होते गए।

फिर एक दिन जब विनता और कद्रू भृमण कर रही थी। कद्रू ने सागर के किनारे दूर खड़े सफेद घोड़े को देखकर विनता से कहा- “बता सकती हो विनता ! दूर खड़ा वह घोडा किस रंग का है ?” विनता बोली- “सफेद रंग का।”कद्रू बोली- “शर्त लगाकर कह सकती हो कि घोडा सफेद रंग का ही है। मुझे तो इसकी पूंछ काले रंग की नजर आ रही है।”
विनता बोली- “तुम्हारा विचार गलत है। घोडा पूंछ समेत सफेद रंग का है।”दोनों में काफी देर तक यही बहस छिड़ी रही। आखिर में कद्रू ने कहा- “तो फिर हम दोनों में शर्त हो गई। कल घोड़े को चलकर देखते है। यदि वह सम्पूर्ण सफेद रंग का हुआ तो मैं हारी, और यदि उसकी पूंछ काली निकली तो मैं जीत जाऊंगी। उस हालत में जो भी हम दोनों में से जीतेगी, तो हारने वाली को जितने वाली की दासी बनना पड़ेगा। बोलो तुम्हे मंजूर है ?”
विनता बोली- “मुझे मंजूर है।”रात को ही कद्रू ने अपने सर्प पुत्रों को बुलाकर कहा- “आज रात को तुम सब उच्चेः श्रवा घोड़े की पूंछ से जाकर लिपट जाना। ताकि सुबह जब विनता देखे तो उसे घोड़े की पूंछ काली नजर आए।” योजनानुसार नाग उच्चेः श्रवा घोड़े की पूंछ से जाकर लिपट गए। परिणामस्वरूप सुबह जब कद्रू ने विनता को घोड़े की पूंछ काले रंग की दिखाई तो वह हैरान रह गई। बोली- “ऐसा कैसे हो गया। कल तो इसकी पूंछ बिलकुल सफेद थी।” कद्रू बोली- “खूब तसल्ली से देख लो। घोड़े की पूंछ आरम्भ से ही काली है। शर्त के मुताबित तुम हार चुकी हो। इसलिए अब तुम्हे मेरी दासी बनकर रहना पड़ेगा।”विवशतापूर्वक विनता को कद्रू की दासता स्वीकार करनी पड़ी। माता को उदास देखकर गरुड़ ने पूछा- “क्या ऐसा कोई उपाय नहीं है जिससे आप कद्रू की दासता से मुक्त हो जाए ?”

विनता बोली- “यह तो कद्रू से ही पूछना पड़ेगा। यदि वह प्रसन्न हो जाती है तो मुझे दासता से मुक्त कर देगी।”गरुड़ अपनी माता विनता को लेकर कद्रू के पास पहुंचा और कहा- “क्या ऐसा नहीं हो सकता कि आप मेरी माता को अपनी दासता से मुक्त कर दे।”
कद्रू बोली- “हो सकता है। बशर्ते कि तुम मेरे पुत्रों को अमृत लाकर दे दो।”यह सुनकर गरुड़ सोच में पड़ गया। उसने अपनी माता से पूछा- “माँ ! अमृत कहा मिलेगा जिसे लेकर मैं तुम्हे दासी जीवन से मुक्त कर संकू।” विनता ने कहा- “अमृत का पता तुम्हारे पिता बता सकते है पुत्र ! तुम उन्हीं के पास जाकर पूछो।”गरुड़ महर्षि कश्यप के पास पहुंचा। कश्यप अपने पुत्र को देखकर बहुत प्रसन्न हुए। गरुड़ ने उनसे पूछा- “पिताश्री ! मैं अमृत लेकर अपनी माता को दासता से मुक्ति दिलाना चाहता हूं। कृपया मुझे बताइये कि अमृत कहा मिलेगा।” महर्षि बोले- “पुत्र ! देवराज इंद्र ने अमृत की सुरक्षा के लिए बहुत व्यापक प्रबंध कर रखा है। वहां तक पहुचना कठिन है।”

गरुड़ बोला- “इंद्र ने कितनी ही कड़ी सुरक्षा प्रबंध क्यों न कर रखे हो। मगर मैं अमृत ले आऊंगा। आप मुझे सिर्फ उस स्थान का पता बता दीजिये।”महर्षि कश्यप ने गरुड़ को इंद्र का पता बता दिया। गरुड़ ने फिर पूछा- “पिताजी ! मुझे भूख बहुत लगती है। कृपया मुझे यह भी बता दीजिये कि इस लम्बे मार्ग में क्या खाकर अपना पेट भरु।”
महर्षि बोले- “अमृत जिस स्थान पर रखा है उस सरोवर तक पहुंचने में तुम्हे वक्त लग जाएगा। इस बीच समुद्र के किनारे तुम्हे निषादों की अनेक बस्तिया मिलेगी। ये निषाद बहुत पतित है और इनके आचरण असुरो जैसे है। तुम इन्हे खाकर अपनी भूख मिटा लेना।”

गरुड़ बोला- “और उसके बाद भी मेरा पेट न भरा तो ?”महर्षि बोले- “सरोवर के अंदर एक विशाल कछुआ रहता है और उसके साथ ही वन में एक महा भयंकर हाथी भी रहता है। दोनों ही बहुत क्रूर और आसुरी प्रवृति के है। तुम उन्हें भी खा सकते हो।”
पिता का आदेश पाते ही गरुड़ अमृत सरोवर की ओर बढ़ चला। मार्ग में उसने निषादों को खाकर अपनी भूख मिटाई। फिर अमृत सरोवर पर पहुंचकर कच्छप और हाथी को अपने पंजो में दबाया और दोनों को खाने के लिए किसी उचित जगह की तलाश में उड़ चला।”

सोमगिरि पर्वत पर लहलहाते ऊंचे वृक्षों को देखकर जैसे ही उसने एक वृक्ष पर बैठना चाहा तो उनके भार से वृक्ष की शाखा टूटकर नीचे गिरने लगी। यह देख गरुड़ तुरंत उड़ा और दूसरे वृक्ष पर जा बैठा। जिस शाखा पर वह बैठा उस शाखा पर उसने उलटे लटके कुछ ऋषियों को तपस्या करते देखा। लेकिन वह शाखा उनके भार से टूटकर नीचे गिरने लगी। यह देख गरुड़ ने शाखा को चोंच में दबाया और हाथी तथा कच्छप को पंजे में दबाए हुए वह अपने पिता के आश्रम की ओर उड चला।

कश्यप के आश्रम में गरुड़ ने उड़ते-उड़ते अपने पिता से पूछा- “पिताजी ! मेरे भार से उस पेड़ की शाखा टूट गई है जिस पर कुछ ऋषि उलटे लटके तपस्या कर रहे थे। मुझे बताइये अब मैं इस शाखा को कहां छोडूं ?”

महर्षि कश्यप बोले- “तुमने बहुत अच्छा किया पुत्र ! जो सीधे यहां चले आए। शाखा, से उलटे लटके हुए ये बालखिल्य ऋषिगण है। अगर इन्हे कष्ट पहुंचा तो ये शाप देकर तुम्हे भस्म कर देंगे।” गरुड़ बोले- “तो फिर बताइये अब मैं क्या करूं ?”महर्षि बोले- “ठहरो, मैं ऋषिगण से प्रार्थना करता हूं कि वे अपना स्थान छोड़कर नीचे आ जाए।”महर्षि कश्यप ने ऋषि गणो से प्रार्थना की। बालखिल्य ऋषियों ने कश्यप की प्रार्थना स्वीकार कर शाखा छोड़ दी और वे हिमालय में तपस्या करने चले गए। चोंच में दबी शाखा को नीचे फेंककर गरुड़ ने भी आनंद से कछुए और हाथी का आहार किया और तृप्त होकर पुनः अमृत लाने के लिए उड़ चला। गरुड़ अमृत सरोवर के पास पहुंचा तो अमृत की रक्षा करते हुए महाकाय देवो और अमृत कलश के चारो ओर घूमते हुए चक्र को देखकर वह हैरान हो गया। उसने सोचा कि ये देव और चक्र देवराज इंद्र ने अमृत कलश की सुरक्षा के लिए लगाए हुए है। चक्र में फंसकर मेरे पंख कट सकते है। इसलिए मैं अत्यंत छोटा रूप धारण कर इसके मध्य में प्रवेश करूंगा।

गरुड़ को देखकर एक देव ने कहा- “यह कोई असुर है जो वेश बदलकर अमृत चुकाने यहां तक पहुंचा है। हमे इसे खत्म कर देना चाहिए।”दोनों देव विद्युत गति से गरुड़ पर टूट पड़े। लेकिन गरुड़ ने अपने पैने पंजो और तीखी चोंच से इन्हे इतना घायल कर दिया कि शीघ्र ही वे दोनों बेहोश होकर गिर पड़े। गरुड़ ने अमृत कलश पंजो में दबाया और वापस उड़ गया। होश में आते ही दोनों रक्षक देव घबराए हुए इंद्र के पास पहुंचे और गरुड़ द्वारा अमृत कलश ले उड़ने की घटना बता दी।यह सुनके इंद्र चकित होकर बोला- “ऐसा कैसे हो गया। सरोवर में रहने वाले विशाल कच्छप और तट पर रहने वाले महाकाय हाथी का क्या हुआ ? उन दोनों को भी उस विशाल गरुड़ ने अपना भोजन बना लिया।”यह सुनकर इंद्र अपनी देव सेवा की एक टुकड़ी के साथ वज्र उठाए इन्द्रपुरी से निकला और गरुड़ की खोज में बढ़ चला। आकाश मार्ग में उड़ते हुए शीघ्र ही उसने गरुड़ को देख लिया और अपना वज्र चला दिया। इंद्र के वज्र का गरुड़ पर कोई असर न हुआ। उसके डैनों से सिर्फ एक पंख वज्र से टकराकर नीचे आ गिरा। देव गरुड़ पर टूट पड़े लेकिन कुछ ही समय में गरुड़ ने उन्हें अपनी पैनी चोंच की मार से अधमरा कर दिया।

यह देख इंद्र सोचने लगा- “यह तो महान पराक्रमी है। मेरे वज्र का इस पर जरा भी असर नहीं हुआ। जबकि मेरे वज्र के प्रहार से पहाड़ तक टूट के चूर्ण बन जाते है। ऐसे पराक्रमी को शत्रुता से नहीं मित्रता से काबू में करना चाहिए।” यह सोचकर इंद्र ने गरुड़ से कहा- “पक्षीराज ! मैं तुम्हारी वीरता से बहुत प्रभावित हुआ हूं। इस अमृत कलश को मुझे सौंप दो और बदले में जो भी वर मांगना चाहते हो मांग लो।”

गरुड़ बोला- “यह अमृत मैं अपने लिए नही, अपनी माता को दासता से मुक्त कराने के लिए नाग माता को देने के लिए ले जा रहा हूं। इसलिए यह कलश मैं तुम्हे नहीं दूंगा।”इंद्र बोला- “ठीक है, इस समय तुम कलश ले जाकर नाग माता को सौंप दो किन्तु उन्हें इसे प्रयोग मत करने देना। उचित मौका देखकर मैं वहां से यह कलश गायब कर दूंगा।”
गरुड़ बोला- “अगर मैं तुम्हारी बात को मान लूं तो मुझे बदले में क्या मिलेगा ?”इंद्र बोला- “तुम्हारा मनपसंद भरपेट भोजन। तब मैं तुम्हे इन्ही नागो को खाने की इजाजत दे दूंगा।”गरुड़ बोला- “यही तो मैं चाहता हूं। नाग मेरे स्वादिष्ट भोजन है किन्तु एक ही पिता की संतान होने के कारण मैं इन्हे कहते हुए हिचकता हूं। अब मेरी हिचक दूर हो गई। अब मैं आपके कथानुसार ही कार्य करूंगा।”

यह कहकर गरुड़ अमृत कलश लेकर कद्रु के पास पहुंचा और उससे बोला- “माते ! अपनी प्रतिज्ञानुसार मैं अमृत कलश ले आया हूं। अब आप अपने वचन से मेरी माता को मुक्त कर दे।”

कद्रु ने उसी क्षण विनता को वचन से मुक्त कर दिया और अगली सुबह अमृत नागो को पिलाने का निश्चय कर वहां से चली गई। रात को उचित मौका देखकर इंद्र ने अमृत कलश उठा लिया और पुनः उसी स्थान पर पहुंचा दिया।

दूसरे दिन सुबह नाग जब वहां पहुंचे तो अमृत कलश गायब देखकर दुखी हुए। उन्होंने उस कुशा को ही जिस पर अमृत कलश रखा था चाटना आरम्भ कर दिया जिसके कारण उनकी जीभ दो हिस्सों में फट गई।

गरुड़ की मातृभक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु गरुड़ के सम्मुख प्रकट हो गए और बोले- “मैं तुम्हारी मातृभक्ति देखकर बहुत प्रसन्न हूं पक्षीराज ! मैं चाहता हूं कि अब से तुम मेरे वाहन के रूप में मेरे साथ रहा करो।”

गरुड़ बोला- “मैं बहुत भाग्यशाली हूं प्रभु जो स्वयं आपने मुझे अपना वाहन बनाना स्वीकार किया। आज से मैं हर क्षण आपकी सेवा में रहूंगा और आपको छोड़कर कही नहीं जाऊंगा।”

इस तरह उसी दिन से पक्षीराज गरुड़ भगवान विष्णु के वाहन के रूप में प्रयुक्त होने लगे। गरुड़ के भगवान विष्णु की सेवा में जाते ही देवता भयमुक्त हो गए।और चूँकि नागों के छल के कारण गरुड़ की माँ विनीता को दासता स्वीकार करनी पड़ी इसलिए नाग और गरुड़ एक दूसरे के दुशमन है ।

क्या होता है इंसान की मृत्यु के बाद? – जानिए गरूड़ पुराण से

जीवन का सच है, यह एक ऐसा सच है जो हर व्यक्ति जानता है और समझता है पर फिऱ भी उससे भागने की हर पल कोशिश करता है। हर धर्म और ग्रंथ में वर्णित है कि जो भी इस संसार में जन्मा है उसे एक ना एक दिन मरना जरूर होगा। भारतीय पुराणों में भी मृत्यु का विशेष जिक्र मिलता है, पुराणों में तो मृत्यु के बाद का भी वर्णन है जिससे पता चलता है कि आखिर मरने के बाद इंसान यानि की जीवआत्मा का क्या होता है।


आज इसी रहस्य को हम बताने जा रहे हैं जो गरूड़ पुराण से लिया गया है, इसे ध्यानपुर्वक पढ़े।

पुराणों के अनुसार जो मनुष्य अच्छे कर्म करता है उसके प्राण हरने देवदूत आते हैं और उसे स्वर्ग ले जाते हैं जबकि जो मनुष्य जीवन भर बुरे कामों में लगा रहता है उसके प्राण हरने यमदूत आते हैं और उसे नरक में ले जाते हैं लेकिन उसके पहले उस जीवात्मा को यमलोक ले जाया जाता है, जहां यमराज उसके पापों के आधार पर उसे सजा देते हैं ।
मृत्यु के बाद जीवात्मा यमलोक तक किस प्रकार जाती है इसका विस्तृत वर्णन गरूड़ पुराण में मिलता है। गरूड़ पुराण में यह भी बताया गया है कि किस प्रकार मनुष्य के प्राण निकलते हैं और किस तरह वह प्राण पिंडदान प्राप्त कर प्रेत का रूप लेते हैं। यह पुराण विशेषकर भगवान विष्णु के वाहन गरूड़ जी के संवाद पर आधारित है। माना जाता है कि इस पुराण में हर प्रक्रिया का वर्णन मिलता है।

गरूड़ पुराण के अनुसार जिस मनुष्य की मृत्यु होने वाली होती है वह बोलने की इच्छा होने पर भी बोल नहीं पाता है। अंत समय में उसमें दिव्यदृष्टि उत्पन्न होती है और वह संपूर्ण संसार को एकरूप समझने लगता है। उसकी सभी इंद्रियां नष्ट हो जाती हैं और वह जड़ अवस्था में हो जाता है यानी हिलने-डुलने में असमर्थ हो जाता है।

इसके बाद उसके मुंह से झाग निकलने लगते हैं और लार टपकने लगती है। पापी पुरूष के प्राण नीचे के मार्ग से निकलते हैं। उस समय दो यमदूत आते हैं, वे बड़े भयानक व क्रोधयुक्त नेत्र वाले तथा पाशदंड को धारण करने वाले नग्न अवस्था में रहते हैं। वे अपने दांतों से कट-कट शब्द करते हैं।

यमदूतों के कौए जैसे काले बाल होते हैं, उनका मुंह तेड़ा-मेड़ा होता है, नाखून ही उनके शस्त्र होते हैं। ऐसे यमराज के दूतों को देखकर प्राणी भयभीत होकर मलमूत्र त्याग करने लग जाता है। उस समय शरीर से अंगूष्ठमात्र(अंगूठे के बराबर) जीव हा हा शब्द करता हुआ निकलता है, जिसे यमदूत पकड़ लेते हैं।

यमराज के दूत उस भोगने वाले शरीर को पकड़कर पाश गले में बांधकर उसी क्षण यमलोक को ले जाते हैं जैसे- राजा के सैनिक दण्डनीय प्राणी को पकड़ कर ले जाते हैं। उस पापी जीवात्मा को रास्ते में थकने पर भी यमराज के दूत भयभीत करते हैं और उसको नरक के दु:ख को बार-बार सुनाते हैं।

यमदूतों की ऐसी भयानक बातें सुनकर पापात्मा जोर-जोर से रोने लगती है किंतु यमदूत उस पर बिल्कुल भी दया नहीं करते हैं। इसके बाद वह अंगूठे के बराबर भोगने वाला शरीर यमदूतों से डरता और कांपता हुआ, कुत्तों के काटने से दु:खी हो अपने किए हुए पापों को याद करते हुए चलता है।

आग की तरह गर्म हवा तथा गर्म बालू पर वह जीव चल नहीं पाता है और वह भूख-प्यास से भी व्याकुल हो उठता है। तब यमदूत उसकी पीठ पर चाबुक मारते हुए उसे आगे ले जाते हैं। वह जीव जगह-जगह गिरता है और बेहोश हो जाता है और फिर उठ कर चलने लगता है। इस प्रकार यमदूत उस पापी को अंधकाररूप मार्ग से यमलोक ले जाते हैं।
घर में आकर वह जीवात्मा अपने शरीर में पुन: प्रवेश करने की इच्छा करती है परंतु यमदूत के पाश बंधन से वह मुक्त नहीं हो पाती और भूख-प्यास के कारण रोती है। पुत्र आदि जो पिंड और अंत समय में दान करते हैं, उससे भी प्राणी की तृप्ति नहीं होती क्योंकि पापी पुरुषों को दान, श्रद्धांजलि द्वारा तृप्ति नहीं मिलती, इस प्रकार भूख-प्यास से युक्त होकर वह जीव यमलोक को जाता है।

गरूड़ पुराण के अनुसार मनुष्य की मृत्यु के बाद 10 दिन तक पिंडदान अवश्य करना चाहिए। उस पिंडदान के प्रतिदिन चार भाग हो जाते हैं। उसमें दो भाग तो पंचमहाभूत देह के पुष्टि देने वाले होते हैं, तीसरा भाग यमदूत का होता है तथा चौथा भाग प्रेत खाता है। नवे दिन पिंडदान करने से प्रेत का शरीर बनता है, दसवे दिन पिंडदान देने से उस शरीर को चलने की शक्ति प्राप्त होती है।

गरूड़ पुराण के अनुसार शव को जलाने के बाद पिंड से हाथ के बराबर का शरीर उत्पन्न होता है। वही यमलोक के मार्ग में शुभ-अशुभ फल को भोगता है। पहले दिन पिंडदान से मूर्धा (सिर), दूसरे दिन से गर्दन और कंधे, तीसरे दिन से ह्रदय, चौथे दिन के पिंड से पीठ, पांचवे दिन से नाभि, छठे और सातवे दिन से कमर और नीचे का भाग, आठवे दिन से पैर, नवे और दसवे दिन से भूख-प्यास आदि उत्पन्न होती है। ऐसे पिंड शरीर को धारण कर भूख-प्यास से व्याकुल प्रेत ग्यारहवे और बारहवे दिन का भोजन करता है।

यमदूतों द्वारा तेरहवे दिन प्रेत को बंदर की तरह पकड़ लिया जाता है। इसके बाद वह प्रेत भूख-प्यास से तड़पता हुआ यमलोक को अकेला ही जाता है। यमलोक तक पहुंचने का रास्ता वैतरणी नदी को छोड़कर छियासी हजार योजन है। उस मार्ग पर प्रेत प्रतिदिन दो सौ योजन चलता है। इस प्रकार वह 47 दिन लगातार चलकर यमलोक पहुंचता है।

इस प्रकार मार्ग में सोलह पुरियों को पार कर पापी जीव यमराज के घर जाता है। इन सोलह पुरियों के नाम इस प्रकार है-सौम्य, सौरिपुर, नगेंद्रभवन, गंधर्व, शैलागम, क्रौंच, क्रूरपुर, विचित्रभवन, बह्वापाद, दु:खद, नानाक्रंदपुर, सुतप्तभवन, रौद्र, पयोवर्षण, शीतढ्य, बहुभीति। इन सोलह पुरियों को पार करने के बाद आगे यमराजपुरी आती है। पापी प्राणी यम, पाश में बंधे हुए मार्ग में हाहाकार करते हुए अपने घर को छोड़कर यमराज पुरी को जाते हैं।